अररिया(रंजीत ठाकुर): कुछ बीमारियां जानलेवा तो नहीं होती, लेकिन जीवन को बेहद कष्टपूर्ण बना देती है। फाइलेरिया यानी हाथीपांव, कालाजार, कुष्ठ सहित कुल 20 रोग उपेक्षित किन्तु गंभीर बीमारियों में शुमार हैं। ये ऐसी बीमारियां हैं जो व्यक्ति को आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक तौर पर कमजोर बनाता है।
इन बीमारियों के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल 30 जनवरी को वर्ल्ड नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज डे के रूप में मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य इन उपेक्षित बीमारियों पर पूर्ण विराम लगाना है। हाल के वर्षों में इन उपेक्षित बीमारियों को जड़ से खत्म करने को लेकर केंद्र व राज्य सरकार की सक्रियता काफी बढ़ी है। इन बीमारियों को उपेक्षित न मानकर सामाजिक सहभागिता के साथ काम करते हुए इससे पार पाने का प्रयास किया जा रहा है।
कालाजार के मामलों प्रभावी नियंत्रण हुआ संभव
नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज में शुमार कालाजार पर प्रभावी नियंत्रण के प्रयासों में हाल के वर्षों में जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभागीय प्रयासों के हाल के दिनों में कालाजार के मामलों में काफी कमी आयी है।
वीवीडीसीओ ललन कुमार ने बताया कि वर्ष 2007 जहां जिले में कालाजार के चार हजार से अधिक मामले थे। वहीं वर्ष 2022 में इसकी संख्या घट कर 22 हो चुकी है। उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में लिम्फोडर्मा 964, हाड्रोसिल के 446 व फाइलेरिया के 1410 मरीज होने की जानकारी उन्होंने दी।
2027 तक एनटीडी रोग से मुक्त करने का लक्ष्य केंद्र सरकार ने निर्धारित समय अवधि पर देश को कुछ गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने का लक्ष्य तय किया है। डब्ल्यूएचओ फाइलेरिया उन्मूलन के लिये 2030 का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वहीं भारत ने इससे तीन साल पहले 2027 में ही इसे खत्म करने का निर्णय लिया है। इस संकल्प को फलीभूत करने का युद्धस्तर पर प्रयास हो रहा है। युद्धस्तर पर हो रहा रोग उन्मूलन का प्रयास एनटीडी रोग उन्मूलन के प्रयासों के तहत विभिन्न संस्थाएं स्वास्थ्य विभाग के कंधा से कंधा मिलाकर काम कर रही है।
निर्धारित लक्ष्य प्राप्ति के लिये लंबे समय से समाज के मुख्य धारा से अलग थलग फाइलेरिया व कालाजार मरीजों का नेटवर्क व पेशेंट सपोर्ट ग्रुप तैयार किया गया है। इस पहल से मरीजों को एक प्लेटफार्म मिला है। जहां वे आपस में मिल बैठ कर अपना दुख-दर्द बांटने के साथ समाज को इन बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिये जागरूक कर रहे हैं।
नेटवर्क से जुड़े रानीगंज के धामा पंचायत निवासी 55 वर्षीय अबु नसर बताते हैं कि वर्षों से फाइलेरिया के असहनीय पीड़ा से गुजरा हूं। पांव में सूजन की वजह से चलना-फिरना भी दूभर हो गया था। जब से नेटवर्क के संपर्क में आये हैं। सरकारी सुविधा से जुड़ने का मौका तो मिला ही साथ में प्रभावित अंगों की साफ-सफाई व व्यायाम के तौर तरीकों को जानकर सूजन को बहुत हद तक कम करने में सफलता मिली है।
अब रोज पैदल अपने खेतों पर जाता हूं। और घर का जरूरी काम भी आसानी से निपटाने लगा हूं। रोग से खुद के बचाव में निहित है सुरक्षा जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि एनटीडी रोग में शुमार फाइलेरिया यानी हाथीपांव एक ऐसी बीमारी है जो व्यक्ति को जीवन भर के लिये दिव्यांग बना देता है।
मच्छर काटने से होने वाले इस रोग के लक्षण काफी देर से दिखते हैं। ये शरीर के लसिका तंत्र लिम्फैटिक सिस्टम को सीधे प्रभावित करता है। इसका कोई कारगर इलाज नहीं है। इसलिये बचाव में ही सुरक्षा निहित है। फाइलेरिया उन्मूलन के लिये सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम, रूगण्ता प्रबंधन, दिव्यांगता निवारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
