बिहार

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर एम्स पटना ने स्वास्थ्य नवाचार को दिया बढ़ावा

पटना, न्यूज़ क्राइम 24। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर एम्स पटना इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन काउंसिल ने ब्लॉक चेन फॉर इम्पैक्ट के सहयोग से स्थापित एम्स पटना-बीएफआई इन्क्यूबेशन सेंटर के साथ मिलकर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर चिकित्सकों, मार्गदर्शकों और वरिष्ठ संकाय सदस्यों के योगदान का सम्मान किया गया तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स पटना तथा अध्यक्ष, एपीआईआईसी थे। उनके साथ प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक; प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक); प्रो. (डॉ.) संजय पांडेय, अधिष्ठाता (अनुसंधान); प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार, अधिष्ठाता (परीक्षा); प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा, अधिष्ठाता (छात्र कल्याण); डॉ. क्रांति भावना, प्रधान अन्वेषक, एपीआईआईसी एवं विभागाध्यक्ष, ईएनटी; प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार, सह-प्रधान अन्वेषक, एपीआईआईसी एवं विभागाध्यक्ष, ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा; डॉ. सुदीप कुमार, प्रधान अन्वेषक, एम्स पटना–बीएफआई इन्क्यूबेशन सेंटर एवं प्रोफेसर, अस्थि रोग विभाग; तथा डॉ. मौसमी साहा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एपीआईआईसी एवं सलाहकार, एम्स पटना–बीएफआई इन्क्यूबेशन सेंटर सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक, संकाय सदस्य, शोधकर्ता, नवप्रवर्तक, स्टार्टअप प्रतिनिधि एवं छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. श्वेता जिंदल, प्रोग्राम डायरेक्टर – मेडटेक इनोवेशन, बीएफआई तथा प्रौद्योगिकी अनुवाद एवं नवाचार प्रभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने वर्चुअल माध्यम से अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एपीआईआईसी के द्वितीय इन्क्यूबेशन एवं इग्निशन ग्रांट कॉल का शुभारंभ रहा। इसके तहत चिकित्सा, मेडटेक, डिजिटल हेल्थ, बायोटेक्नोलॉजी, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग तथा अन्य स्वास्थ्य क्षेत्रों में काम कर रहे चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों, नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स से आवेदन आमंत्रित किए गए।

चयनित प्रतिभागियों को आर्थिक सहायता (इग्निशन ग्रांट), विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, एम्स पटना की क्लीनिकल एवं अनुसंधान सुविधाओं का उपयोग, बौद्धिक संपदा (आईपी), नियामकीय प्रक्रिया, प्रौद्योगिकी परीक्षण और उद्योग से जुड़ने का अवसर मिलेगा ताकि उनके नवाचार आम लोगों तक पहुँच सकें।

कार्यक्रम में बीएफआई फुल स्टैक इनोवेशन प्रोग्राम की भी जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम नवप्रवर्तकों को एक विचार से लेकर प्रोटोटाइप, क्लीनिकल परीक्षण, नियामकीय मंजूरी और बाज़ार तक पहुँचने की पूरी प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करता है।

अपने संबोधन में प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि एम्स पटना का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता मिलकर देश की स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान तैयार करें। उन्होंने कहा कि एपीआईआईसी और एम्स पटना-बीएफआई इन्क्यूबेशन सेंटर पूर्वी भारत में स्वास्थ्य नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट चिकित्सकों, मार्गदर्शकों और वरिष्ठ संकाय सदस्यों को रोगी सेवा, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह आयोजन स्वास्थ्य क्षेत्र में नए विचारों को प्रोत्साहित करने, युवा नवप्रवर्तकों को अवसर प्रदान करने और देश के लिए सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य समाधान विकसित करने की दिशा में एम्स पटना की प्रतिबद्धता का परिचायक रहा।

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