बिहार

बुर्का-हिजाब पर रोक लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ, भाजपा-आरएसएस के इशारे पर लिया गया फैसला : गोपाल रविदास

फुलवारीशरीफ, अजित। बिहार में सराफा दुकानों में बुर्का, हिजाब और नकाब पहनकर प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है. फुलवारी शरीफ के पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने ऑल इंडिया गोल्ड एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इसे संविधान विरोधी और अलोकतांत्रिक करार दिया है।

पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने कहा कि यह फैसला कहीं न कहीं भाजपा और आरएसएस के इशारे पर लिया गया प्रतीत होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा का बहाना बनाकर एक खास समुदाय और खास पहनावे को निशाना बनाया जा रहा है, जो देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

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गोपाल रविदास ने कहा कि अगर अपराध रोकना ही उद्देश्य है तो सरकार और प्रशासन को पुलिस व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड और तकनीकी उपाय बढ़ाने चाहिए, न कि महिलाओं के पहनावे पर पाबंदी लगाई जाए. उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले मुस्लिम महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से अलग-थलग करने की मानसिकता को दर्शाते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आज़ादी देता है. किसी संगठन या व्यापारी वर्ग को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने स्तर से संविधान से ऊपर जाकर नियम बनाए. इस तरह की सोच समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा देती है। पूर्व विधायक ने राज्य सरकार से मांग की कि वह इस फैसले पर तत्काल संज्ञान ले और यह सुनिश्चित करे कि सुरक्षा के नाम पर किसी भी वर्ग के मौलिक अधिकारों का हनन न हो. साथ ही उन्होंने जनता से आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। गौरतलब है कि ऑल इंडिया गोल्ड एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन ने बिहार सहित कई राज्यों में सराफा दुकानों में बुर्का, हिजाब, नकाब, घूंघट और हेलमेट पहनकर प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है, जिसे लेकर राज्य भर में विरोध और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है।

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