अररिया, रंजीत ठाकुर : नरपतगंज विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल के जिला अध्यक्ष मनीष यादव को रविवार की सुबह टिकट मिलने के बाद समर्थकों व सहयोगियों में आक्रोश फैल गया और सोशल मीडिया पर जमकर विरोध किया। कार्यकर्ताओं व सहयोगियों ने तीखा वार करते हुए कहा कि राजद अब पहले जैसी पार्टी नहीं रही, लालू प्रसाद यादव के समय कार्यकर्ताओं का सम्मान होता था, जबकि अब कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं के साथ विश्वासघात हो रहा है। अनिल यादव वही व्यक्ति हैं जिन्होंने अररिया क्षेत्र में राजद को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई और वर्षों तक पार्टी के लिए अपने जीवन और सम्मान की आहुति दी, लेकिन इस बार उनके साथ जो अन्याय हुआ, उसने समर्थकों के आंसू बहा दिए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अनिल यादव ने पार्टी की नीतियों और नेताओं के फैसलों से असहमति जताते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन करने का मन बना लिया है। इस चुनावी परिदृश्य में एक बात स्पष्ट हो चुकी है कि नरपतगंज की राजनीति अब पहले जैसी नहीं रही, और अनिल यादव के साथ हुए इस अन्नाय से पूरे क्षेत्र में एक सशक्त संदेश छोड़ा है कि जनता अपने नेताओं के सम्मान और उनके योगदान को कभी नहीं भूलेगी, चाहे राजनीतिक परिस्थितियाँ कैसी भी हों। राजद के जिलाध्यक्ष मनीष यादव को टिकट मिलने के बाद सोशल मीडिया से लेकर सभा तक अनिल यादव के समर्थकों व ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जताई और नारे लगाकर उनके अपमान को सहन न करने का संदेश दिया। समर्थकों के आंसू और आक्रोश ने यह स्पष्ट कर दिया कि नरपतगंज की जनता अपने पुराने और अनुभवी नेताओं की प्रतिष्ठा और सम्मान को हमेशा याद रखेगी।
कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानीय स्तर पर सभा भी आयोजित की गई, जो नरपतगंज प्रखंड मुख्यालय के व्यापार मंडल परिसर में संपन्न हुई, जहाँ सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे और अपने नेता के पक्ष में आवाज बुलंद की। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार का चुनाव न केवल राजद और बीजेपी के बीच ही नहीं होगा बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों और पुराने नेताओं के समर्थकों के बीच भी निर्णायक संघर्ष देखने को मिल सकता है। अनिल यादव की छवि न केवल अनुभवी नेता के रूप में है बल्कि जनता के बीच विश्वास और सम्मान की प्रतीक के रूप में है, जिन्होंने वर्षों तक विकास और जनहित के कार्य किए, और उनके साथ हुए इस प्रकार के विश्वासघात ने उनके समर्थकों के मन में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
राजद के वरिष्ठ नेताओं को यह समझना होगा कि केवल नए चेहरे और संगठनात्मक फैसले से काम नहीं चलेगा, बल्कि पुराने और अनुभवी नेताओं के सम्मान को बनाए रखना भी पार्टी की मजबूती के लिए आवश्यक है। अनिल यादव के समर्थक सोशल मीडिया पर लगातार अपने नेता के सम्मान में पोस्ट कर रहे हैं और नए उम्मीदवार को टिकट देने पर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं, जिससे स्पष्ट हो गया है कि इस बार नरपतगंज विधानसभा की राजनीति में एक नया तूफ़ान आने वाला है। स्थानीय राजनीतिक समीक्षक बताते हैं कि इस बार का चुनाव अनिल यादव के नेतृत्व में निर्दलीय संघर्ष के रूप में परिदृश्य अलग हो जाएगा।
बताते चले कि नरपतगंज विधानसभा में सियासी पारा इस बार ऊँचाई पर पहुंच गया है, जहाँ पिछले वर्षों की राजनीति की पुरानी गाथाएँ और नए समीकरण एक साथ उभर कर सामने आए हैं। अनिल यादव, जो 2005 में राष्ट्रीय जनता दल से विधायक रह चुके हैं और 2015 में भी अपनी सक्रिय भूमिका से विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, इस बार टिकट के विवाद में मुख्य पात्र बनकर उभरे हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में नरपतगंज में राजद को बीजेपी के खिलाफ कड़ी चुनौती मिली थी, तब जयप्रकाश यादव ने बीजेपी से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार राष्ट्रीय जनता दल ने नरपतगंज विधानसभा से अपने उम्मीदवार को बदल दिया, जिससे राजनीतिक परिदृश्य में हलचल पैदा हो गई।
