अररिया, रंजीत ठाकुर बर्षों से सड़क की बदहाली से तंग आकर रविवार को सोनापुर पंचायत के दर्जनों ग्रामीणों ने कीचड़ वाली सड़क पर धान की रोपनी कर दिया । रोपनी कर ग्रामीणों ने घंटो टायर जलाकर अपना विरोध जताया तथा सड़क को शीघ्र बनाने की मांग की । बताया जाता है कि सोनापुर से बथनाहा को जोड़ने वाली ग्रामीण सड़क जो सैनिक रोड़ भोड़हर से सोनापुर होते हुवे बथनाहा तक जाती है जो कई वर्षो से बदहाल है । उक्त सड़क पर जलजमाव व कीचड़ के बीच जनप्रतिनिधियों के क्रियाकलाप से नाराज लोगों ने जमकर विरोध जताया । विरोध स्थानीय युवा व महिलाओं ने भी किया एवं कीचड़युक्त सड़क पर धान की रोपनी कर अपना आक्रोश व्यक्त किया ।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस सड़क से भोड़हर,पथरदेवा, चकोड़वा, जिमराही ,श्यामनगर, कोचगामा,अमौना सहित दर्जनों गांव व टोले के ग्रामीणों का दिन-रात आवागमन होता है । सोनापुर के पथरदेवा में एसएसबी बीओपी कैम्प भी है । सुरक्षा के दृष्टिकोण से एसएसबी जवानों के आवागमन लिए भी यह मार्ग अति महत्वपूर्ण है । फिर भी इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है । इस सड़क की मरम्मती व पीसीसी ढलाई के लिए लोगों ने कई बार नरपतगंज विधायक तथा अररिया के सांसद को लिखित आवेदन देकर मांग भी किया था। लेकिन जनप्रतिनिधियों ने एक बार भी इस सड़क पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा । जिसको लेकर ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया और सड़क पर धान की रोपनी कर विरोध जताया हैं ।
रविवार के सुबह ग्रामीणों ने सड़क घेर कर प्रदर्शन किया। वहीं ग्रामीणों ने सांसद व विधायक के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगाए । वहीं सूचना पर बथनाहा थानाध्यक्ष धनोज कुमार गुप्ता दल-बल के साथ स्थल पर पहुँचे और आक्रोशित ग्रामीणों को कड़ी मस्सकत के बाद समझा-बुझाकर मामले को शांत करवाया । मामले को लेकर ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रवीण कुमार से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इस रोड़ का प्राक्कलन बनाकर कर स्वीकृति के लिए भेजा गया है । अभी स्वीकृति नहीं मिली है। यह सड़क को पहली प्राथमिकता में रखी गई है। उन्होंने कहा कि डीपीआर बनाकर भी तैयार है ।
स्वीकृति मिलते ही कार्य आरम्भ कर दी जाएगी । बता दें कि अधिकारी के द्वारा इस तरह की बातें हैं कई महीनों पूर्व से बताया जा रहा है। ऐसा लगता है कि इस सड़क के लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधि को जरा भी दिलचस्पी नहीं है। अगर ग्रामीणों का दुख दर्द को समझते तो यह सड़क को केंद्रीय प्रधानमंत्री सड़क योजना या फिर मुख्यमंत्री सड़क योजना से स्वीकृति मिल सकती थी। क्षेत्र के ग्रामीण सड़क के लिए त्राहिमाम है। लेकिन जनप्रतिनिधि को इसका जरा भी ख्याल नहीं है। स्थिति यह है कि केवल नाम का सड़क है। सड़क पर सड़क ही नहीं है। फिर भी विभागीय अधिकारी खामोश हैं।
