पूर्णिया(रंजीत ठाकुर): मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए भारत सरकार द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। इसके माध्यम से प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थियेटर में प्रसूता को आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके। जिसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से आयुष के कार्यक्रम प्रबंधक डॉ रजनीश कुमार एवं जिला स्वास्थ्य समिति मोतिहारी के अस्पताल प्रबंधक विजय चंद्र झा अपने दो सदस्यीय टीम के साथ रेफ़रल अस्पताल रुपौली के तीन दिवसीय दौरे पर आकर निरीक्षण करने वाले हैं।
स्थानीय स्तर के अधिकारियों द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद आ रही हैं स्वास्थ्य विभाग की टीम : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ एसके वर्मा ने बताया कि पिछले दिनों राज्य स्वास्थ्य समिति पटना की ओर से राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (मातृ स्वास्थ्य एवं गुणवत्ता यक़ीन पदाधिकारी) डॉ सरिता सिम्बा, स्थानीय क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई पूर्णिया के क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमूल होदा, जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से जिला गुणवत्ता एवं यकीन पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार शर्मा, यूनिसेफ़ के क्षेत्रीय सलाहकार शिव शेखर आनंद, केयर इंडिया के डीटीएल आलोक पटनायक द्वारा संयुक्त रूप से रेफ़रल अस्पताल का निरीक्षण किया जा चुका है। इनलोगों द्वारा हरी झंडी दिए जाने के बाद ही राज्य स्तरीय टीम द्वारा प्रसव कक्ष का निरीक्षण कार्यक्रम बनाया गया है।
प्रसव कक्ष एवं संबंधित कई अन्य बिंदुओं पर विस्तृत रूप से की जाएगी गहन जांच : आरपीएम
क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रबंधक नजमूल होदा ने बताया कि राज्य स्तरीय दो सदस्यीय टीम के द्वारा तीन दिनों तक रेफ़रल अस्पताल रुपौली का निरीक्षण किया जाना है। निरीक्षण के दौरान प्रसव कक्ष से संबंधित संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव के लिए उपलब्ध संसाधनों का बहुत ही बारीकियों के साथ निरीक्षण कार्यक्रम बनाया गया है। स्थानीय रेफ़रल अस्पताल में प्रसूति कराने के लिए आने वाली महिलाओं से संबंधित सभी तरह की आवश्यक फाइलों की गहन जांच करने के साथ ही अस्पताल के अधिकारियों एवं कर्मियों से लक्ष्य कार्यक्रम से संबंधित सभी तरह के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की जानी है।
राज्य स्तरीय टीम के आने की सूचना से स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मियों में ख़ुशी की लहर : आरएच रुपौली
रेफ़रल अस्पताल रुपौली के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मिथिलेश कुमार एवं अस्पताल प्रबंधक सेलिमा खातून ने बताया कि स्थानीय अस्पताल में लक्ष्य कार्यक्रम के तहत राज्य स्तरीय टीम के द्वारा निरीक्षण होने वाला है, जिससे हमलोग काफ़ी गौरवान्वित है। क्योंकि अभी तक स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जितना संसाधन उपलब्ध था उसी के बदौलत हमलोगों के द्वारा बेहतर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही थी। लेकिन अब लक्ष्य प्रमाणीकरण के बाद उत्कृष्ट कार्य किया जाएगा। क्योंकि प्रमाणीकरण के बाद नई-नई टेक्नोलॉजी की उपलब्धता हो जाएगी। जिससे आसपास की गर्भवती महिलाओं को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी।
लक्ष्य योजना के तहत प्रमाणीकरण के बाद मिलती है आर्थिक सहायता : यूनिसेफ़
यूनिसेफ़ के क्षेत्रीय सलाहकार शिव शेखर आनंद ने बताया कि अस्पताल की आधारभूत संरचना, साफ-सफाई एवं स्वच्छता, जैविक कचरा निस्तारण, संक्रमण रोकथाम, अस्पताल की अन्य सहायक प्रणाली, स्वच्छता एवं साफ़-सफाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लक्ष्य कार्यक्रम के तहत प्रमाणीकरण होना अनिवार्य होता है। वहीं केयर इंडिया के डीटीएल आलोक पटनायक ने बताया कि राज्य स्तरीय टीम के द्वारा निरीक्षण के बाद जांच से संबंधित प्रमाण पत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है। इससे अस्पताल के प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थियेटर में अत्याधुनिक उपकरणों की सुविधाओं के साथ प्रसव से जुड़ी नई तकनीकी का प्रयोग किया जा सकता है।
