बिहार

लोक सूचना पदाधिकारी के द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की उड़ाई जा रही है धज्जियां

अररिया(रंजीत ठाकुर): अररिया जिले के प्रखंड कार्यालय नरपतगंज में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई सूचनाओं पर लोक सूचना पदाधिकारी के द्वारा उड़ाई जा रही है धज्जियां। अधिनियम के अनुसार 30 दिनों के अंदर सूचना उपलब्ध कराना है, परंतु 3 माह बीत जाने के बावजूद सूचना उपलब्ध नहीं कराया जाना? कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार का बढ़ावा देना साबित हो रहा है।

बताते चलें कि नवाबगंज पंचायत वार्ड संख्या-07 (सात) निवासी ललन कुमार दास ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अनुसार लोक सूचना पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी नरपतगंज को दिनांक 28 फरवरी 2022 को रजिस्ट्री डाक के माध्यम से अधिनियम के अनुसार सूचना का मांग किया गया था। जिसमें

“”मांगी गई सूचना- 18 फरवरी 2022 को हम ग्रामीण जनता के द्वारा गलत तरीके से वार्ड सचिव का चयन को रद्द करते, वार्ड सभा करवाने एवं वार्ड सचिव का चयन करवाने के संबंध में ग्राम पंचायत राज नवाबगंज वार्ड संख्या-07 के आलोक में आवेदन पत्र समर्पित किया गया है। उक्त आवेदन पत्र पर की गई कृत कार्यवाई की सूचना एक सप्ताह में उपलब्ध करवाने की कृपा करें””।

Advertisements
Ad 1

आवेदक श्री दास ने बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना की मांग के संबंध में कई बार प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा चुका हूं, परंतु किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। बिहार सरकार एवं केंद्र सरकार के द्वारा भ्रष्टाचार को रोकने का जो अधिनियम बनाया गया है, भ्रष्ट पदाधिकारियों के चलते विफल नजर आता दिख रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि पदाधिकारियों के सहयोग से भ्रष्टाचार का बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने एक और खुलासा किया है कि- “”लोक सूचना पदाधिकारी सह प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी नरपतगंज को भी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत 22 फरवरी को ही रजिस्ट्री डाक के द्वारा ग्राम पंचायत राज नवाबगंज के वार्ड संख्या 1 से 14 तक के वार्ड सचिव चयन से संबंधित वार्ड आम सभा व वार्ड सचिव चयन व्यक्तियों का नाम सहित अभिप्रमाणित छायाप्रति एक सप्ताह में उपलब्ध करवाने की कृपा करें””। परंतु तीन माह बीत गए सूचना उपलब्ध नहीं कराया गया है। कुल मिलाकर देखा जाए तो साधारण सूचना पदाधिकारियों के द्वारा उपलब्ध ससमय नहीं कराया जाना, कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार का बढ़ावा देना सावित हो रहा है। सरकार के द्वारा भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को लेकर 2005 में यह अधिनियम लाया गया था, ताकि आम जनों को सच्चाई से रूबरू कराया जा सके। लेकिन पदाधिकारियों के चलते आम लोगों को सही जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाता है। राज्य सरकार को चाहिए कि सूचना के अधिकार अधिनियम के द्वारा दिए गए लंबित आवेदनों पर जांच करवाते हुए आवेदक को ससमय सूचना उपलब्ध कराया जाए।

Related posts

लोक कला उत्सव में झलकी परंपरा और सामाजिक संदेश, दर्जनों प्रतिभागी सम्मानित

प्रेमी संग पत्नी रंगे हाथ पकड़ी, पति का फूटा गुस्सा; सड़क पर हाई वोल्टेज ड्रामा, थाने में सुलह

शिवम इलेक्ट्रॉनिक्स में भीषण आग : 12 वर्षीय बच्चा झुलसा, 7-8 लाख का नुकसान

error: