बिहार

पोषण चौपाल का आयोजन कर ग्रामीण लोगों को दी गई पोषण की जानकारी

पूर्णिया(रंजीत ठाकुर): ग्रामीण स्तर पर लोगों को पोषण के लिए जागरूक करने को जिला स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ द्वारा पोषण चौपाल का आयोजन किया गया। के. नगर प्रखंड के काझा पंचायत में आयोजित पोषण चौपाल की अध्यक्षता स्थानीय मुखिया राजेश कुमार ने की। इस चौपाल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं और बच्चों को समय पर अलग अलग प्रकार के पोषण का उपयोग करते हुए अपने स्वास्थ को बेहतर और सुगम बनाने के लिए जागरूक किया गया। आयोजित चौपाल में स्थानीय लोगों को गर्भावस्था के समय उचित पौष्टिक भोजन का उपयोग, नवजात शिशुओं को पहले छः महीने स्तनपान कराने, छः माह के बाद संतुलित आहार के उपयोग करने की जानकारी दी गई। चौपाल में स्वास्थ्य विभाग से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज कुमार, बीसीएम कंचन कुमारी, हेल्थ एजुकेटर संजय सिंह, यूनिसेफ पोषण समन्वयक देवाशीष घोष, सी-मैम टीम से जिला कॉन्सल्टेंट विकास कुमार, पोषण कॉन्सल्टेंट मेघा सिंह, ज्योति कुमारी, यूनिसेफ पोषण डेटा ऑपरेटर प्रियंका सिंह, के. नगर सीडीपीओ रजनी गुप्ता, केयर इंडिया, केयर इंडिया प्रखंड समन्वयक शुभम श्रीवास्तव सहित स्थानीय वार्ड सदस्य, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, आशा व ग्रामीण उपस्थित रहे।

खाने में विविधता लाकर पोषण स्थिति में सुधार के लिए किया गया जागरूक :

सभा को सम्बोधित करते हुए स्थानीय मुखिया राजेश कुमार ने कहा कि लोगों को स्वस्थ रहने के लिए अपने पोषण पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए उन्हें अपने खान-पान में नियमित बदलाव लाना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आसानी से ताजा पोषण आहार उपलब्ध हो सकता है। लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए और इसमें नियमित बदलाव करते हुए अपने पोषण स्थिति को सुधार करना चाहिए जिससे कि वे स्वस्थ्य रह सकें। महिलाओं और बच्चों के पोषण स्थिति में जागरूकता के लिए के.नगर प्रखंड में यूनिसेफ द्वारा सी-मैम कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। लोगों को इसका भी लाभ उठाना चाहिए और महिलाओं और बच्चों को स्वस्थ्य रखना चाहिए।

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए महिलाओं को गर्भावस्था से ही रखना चाहिए ध्यान :

पोषण चौपाल में सीडीपीओ रजनी गुप्ता ने कहा कि बच्चों के स्वस्थ्य जीवन के लिए जन्म से पूर्व से ही लोगों को ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए गर्भावस्था के समय से ही गर्भवती महिलाओं को उचित पोषाहार का उपयोग करना चाहिए। जिससे कि होने वाला बच्चा स्वस्थ्य व तंदुरुस्त हो। इस दौरान महिलाओं को खाने में संतुलन की आवश्यकता है। जिसमें उसे हर तरह के भोजन को शामिल करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भोजन में अनाज, दाल, दूध, हरि सब्जियां, ताजे फल, मांस, मछली, अंडे, चिकन, चिनिया बादाम, काजू आदि लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन खाने में आयरन और फॉलिक एसिड का सही मात्रा में लेना आवश्यक है। इसके उपयोग से उनका स्वास्थ्य तंदुरुस्त रहता जिससे होने वाले बच्चे स्वस्थ्य होते हैं।

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बच्चों के जीवन के पहले 1000 दिन में आवश्यक पोषण देने की मिली जानकारी :

यूनिसेफ जिला पोषण समन्वयक देवाशीष घोष ने कहा कि बच्चों के स्वस्थ्य जीवन के लिए उनके पहले 1000 दिन के दौरान मिलने वाले पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दौरान बच्चों को सभी तरह के पौष्टिक आहार का सेवन कराना चाहिए। शिशुओं को जन्म के 01 घंटे के भीतर ही स्तनपान शुरू कराना चाहिए। जन्म के बाद छः महीने तक शिशुओं को केवल माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए। छः माह बाद से शिशुओं को अतिरिक्त पूरक आहार का सेवन कराना चाहिए जिससे कि शिशु स्वस्थ्य और तंदुरुस्त होगा।

सुरक्षित प्रसव के लिए समय पर अस्पताल में पहुँचना आवश्यक :

चौपाल को सम्बोधित करते हुए के.नगर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि बच्चों के सुरक्षित प्रसव के लिए समय से अस्पताल में पहुँचना आवश्यक है। जहां प्रशिक्षित नर्स व एएनएम की उपस्थिति में सुरक्षित प्रसव कराया जाता है। संस्थागत प्रसव कराने से माँ और होने वाले बच्चे को किसी भी तरह की समस्या होने पर इसका तत्काल इलाज उपलब्ध कराया जाता है। इससे माँ और बच्चा सुरक्षित होते हैं। इसके साथ ही बच्चों के जन्म से माँ को और जन्म के बाद माँ और बच्चों को भी सही पोषण का उपयोग आवश्यक है जिससे कि वे स्वस्थ्य रह सकें। इसके लिए स्थानीय स्तर पर लोग आशा, आंगनबाड़ी सेविकाओं से जानकारी ले सकते हैं। सही पोषण का उपयोग करने से ही माँ और बच्चे स्वस्थ्य रहेंगे।

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