बिहार

95 वर्षीय सुखदेव बाबू: बुलंद हौसला वाले संपतचक के सबसे बुजुर्ग समाजसेवी

फुलवारीशरीफ, अजित। संपतचक प्रखंड के भोगीपुर-चकपुल, एकतापुरम निवासी 95 वर्षीय समाजसेवी सुखदेव बाबू के सहयोग से उड़ीसा के दूरदराज आदिवासी इलाकों में यूनिसेफ और ओडिशा सरकार की साझेदारी द्वारा “जिला समग्र शिक्षा” पहल शुरू की गई है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों को उनकी अपनी मातृभाषा में पढ़ाई देना है, जिससे वे आसानी से सीख सकें और आत्मविश्वास विकसित कर सकें. सात साल की सावित्री, जो पहले स्कूल में डरती और चुप रहती थी, अब उसी कक्षा में आत्मविश्वास से अपने सपनों को आकार दे रही है. उसकी भाषा, जिसे पहले कमजोरी माना जाता था, अब उसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई है। यूनिसेफ के अनुसार मिशन नौनिहाल सम्मान के संस्थापक-संरक्षक सुखदेव बाबू जैसे हजारों समाजसेवी इस पहल के प्रेरक स्तंभ हैं. 95 वर्ष की उम्र में भी वे समाज सेवा में सक्रिय हैं और शारीरिक थकान व अस्वस्थता के बावजूद उनका समर्पण और जज़्बा हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि “वे शायद संपतचक प्रखंड के सबसे उम्रदराज व्यक्ति हैं, लेकिन उनके हौसले और सेवा भावना के सामने उम्र छोटी लगती है। इलाके के लोग बताते हैं कि “सुखदेव बाबू सिर्फ़ व्यक्ति नहीं, बल्कि एक प्रेरणा हैं. उन्होंने हमें सिखाया कि सेवा की कोई उम्र नहीं होती और समाज के लिए जीना ही असली जीवन है.” सुखदेव बाबू ने अपनी पूरी टीम और परिजनों का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि “मेरी टीम और मेरे परिजन ही मेरी असली ताकत हैं. उनके बिना यह नेक यात्रा संभव नहीं है। उनकी प्रेरणा और नेतृत्व से आज सावित्री और कई अन्य बच्चे मुस्कुराते हुए स्कूल जाते हैं. उनका डर अब आत्मविश्वास में बदल गया है और उनकी मातृभाषा ने उन्हें अपनी पहचान से जोड़ा है। यूनिसेफ द्वारा सर्वोच्च मानवाधिकार संरक्षण सम्मान प्राप्त सुखदेव बाबू की सराहना से पूरे इलाके में खुशी और गर्व की लहर फैल गई है।

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