बिहार

गांधी मैदान से वॉकथॉन, पटना में फेफड़ों के बढ़ते खतरे पर नेपकॉन 2025 का बड़ा जागरूकता अभियान

पटना, अजीत। पटना में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण स्तर और उससे पैदा हो रहे फेफड़ों की बीमारियों को लेकर मंगलवार की सुबह गांधी मैदान से एक सशक्त स्वास्थ्य संदेश दिया गया. नेपकॉन 2025 के बैनर तले देशभर के दर्जनों नामचीन डॉक्टरों ने वॉकथॉन निकालकर राजधानी की जनता को यह चेताया कि फेफड़ों का स्वास्थ्य अब गंभीर खतरे में है और समय रहते सावधानी आवश्यक है. डॉक्टरों ने लोगों को बताया कि हवा में बढ़ते कण, धुआं, धूल और मौसम परिवर्तन की वजह से दमा, एलर्जी और फेफड़ों के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.नेपकॉन 2025 कमेटी ने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाले समय में राज्य को फेफड़ा रोग अनुसंधान और प्रशिक्षण का केंद्र बनाने की दिशा में भी मदद करेगा. वॉकथॉन में शामिल डॉक्टरों ने लोगों से अपील की कि वे खुले में प्रदूषण से बचें, मास्क का उपयोग करें, धूम्रपान से दूरी बनाएं तथा नियमित स्वास्थ्य जांच करवाते रहें, ताकि गंभीर बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।

इंडियन चेस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि इस कदर गंभीर स्थितियों के बीच नेपकॉन का 27वां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पहली बार बिहार की धरती पर आयोजित हो रहा है, जो राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है. यह सम्मेलन 11 से 14 दिसंबर तक पटना के ज्ञान भवन में चलेगा. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में पूरे भारत से लगभग 3 हजार विशेषज्ञ डॉक्टर, फेफड़ा रोग विशेषज्ञ, मेडिकल शोधकर्ता और शिक्षाविद् हिस्सा लेंगे, जिससे बिहार को फेफड़ा रोगों के आधुनिक उपचार और शोध की दिशा में बड़ी प्रेरणा मिलेगी।

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उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में करीब 15 देशों से विशेषज्ञों की टीमें आ रही हैं, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, रूस और यूरोपीय देशों के ख्यातिप्राप्त डॉक्टर शामिल हैं. कुल 25 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉक्टर अपने विशेष व्याख्यान में आधुनिक शोध, नई दवाओं, उभरती बीमारियों और फेफड़ों की जटिलताओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करेंगे. सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में 11 दिसंबर को बिहार के राज्यपाल मुख्य अतिथि और स्वास्थ्य मंत्री विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

इस सम्मेलन से पहले तैयारी के रूप में राज्य के लगभग 12 बड़े चिकित्सा संस्थानों—पीएमसीएच, आइजीआइएमएस, एम्स पटना, मेदांता, पारस, रूबन हॉस्पिटल सहित अन्य प्रमुख केंद्रों—में फेफड़ा रोगों पर विशेष वर्कशॉप आयोजित की जा रही हैं. इन वर्कशॉप में डॉक्टरों को नवीनतम शोध, मशीनों की उपयोगिता, फेफड़ों के टेस्ट, ब्रॉन्कोस्कोपी, आईसीयू प्रबंधन और अन्य आधुनिक पद्धतियों की प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि बिहार के चिकित्सकों को बड़े स्तर पर विशेषज्ञता प्राप्त हो सके।

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