बिहार

जिले के और 03 सामुदायिक क्षेत्र के छोटे अस्पतालों को मिला राष्ट्रीय प्रमाणपत्र

कटिहार, (न्यूज़ क्राइम 24) लोगों को सामान्य चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए बड़े सरकारी अस्पताल या फिर निजी प्राइवेट अस्पतालों में ही जाने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा छोटे सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों की जांच और उपचार के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध रखी गई है। अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं और लोगों को मिल रहे लाभ की केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जांच के बाद जिले के 03 और सरकारी अस्पतालों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणपत्र जारी किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के 03 अस्पतालों में शामिल सदर प्रखंड के उप स्वास्थ्य केन्द्र चौकी, फलका प्रखंड के उपस्वास्थ्य केंद्र बभानी और महेशपुर प्रखंड के उप स्वास्थ्य केन्द्र बल्थी महेशपुर को राष्ट्रीय प्रमाणपत्र जारी किया गया है।

तीनों अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा जांच करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट देने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर द्वारा संबंधित अस्पताल को प्रमाणपत्र जारी किया गया है। जारी रिपोर्ट में तीनों अस्पतालों के सभी 07 प्रकार की चिकित्सकीय सहायता और उससे लोगों को मिल रहे लाभ पर केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित अस्पताल को अंक प्रमाण किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एनक्यूएएस प्रमाणपत्र में फलका प्रखंड के उपस्वास्थ्य केंद्र बभानी को 87.02 प्रतिशत अंक, सदर प्रखंड के उप स्वास्थ्य केन्द्र चौकी को कुल 85.19 प्रतिशत अंक और महेशपुर प्रखंड के महेशपुर प्रखंड के उप स्वास्थ्य केन्द्र बल्थी को 81.95 प्रतिशत अंक दिया गया है। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी द्वारा राष्ट्रीय प्रमाणपत्र प्राप्त करने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बधाई देते हुए अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को भी संबंधित अस्पताल के जैसे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सहायता प्रदान करते हुए केंद्रीय प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।

स्थानीय लोगों के उपचार के लिए अस्पताल में सभी 07 प्रकार के स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध :

डीपीएम स्वास्थ्य डॉ किशल्य कुमार ने बताया कि केंद्रीय टीम द्वारा जिले के तीनों अस्पतालों का अलग अलग मूल्यांकन किया गया है। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अस्पताल में स्थानीय लोगों के लिए उपलब्ध सभी 07 प्रकार की आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली गई है। इसमें गर्भवती महिलाओं और प्रसव सुविधा, बच्चों और वयस्कों की स्वास्थ्य सुविधा, अस्पताल में उपलब्ध मरीजों के लिए जांच और दवा व्यवस्था सुविधा, योग्य दम्पत्तियों के लिए परिवार नियोजन सुविधा, संचारी रोग चिकित्सा, गैर संचारी रोग चिकित्सा, संचारी रोग चिकित्सा, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य सुविधाएं और इससे स्थानीय लोगों को मिल रहे लाभ शामिल हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अस्पताल मूल्यांकन के दौरान अस्पताल में उपलब्ध व्यवस्था और स्थानीय लोगों को संबंधित सुविधा से मिल रहे लाभ का मूल्यांकन करते हुए अस्पताल को अंक प्रदान किया गया है।

Advertisements
Ad 1

डॉ किशल्य कुमार ने कहा कि दोनों अस्पतालों को नेशनल एनक्यूएएस प्रमाणपत्र जारी होने से अगले 03 साल तक सभी स्वास्थ्य सुविधा नियमित रूप से जारी रखने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक सहयोग राशि उपलब्ध कराई जाएगी जिससे कि अस्पताल व्यवस्था को नियमित व्यवस्थित रखते हुए स्थानीय लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सहायता प्रदान की जा सके और लोग स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केन्द्र द्वारा स्थानीय लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने के लिए जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा सहयोगी संस्थाओं का भरपूर सहयोग प्राप्त होता है जिसके आधार पर स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक स्वास्थ्य सहायता स्थानीय लोगों को नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती है। डीपीएम स्वास्थ्य डॉ किशल्य कुमार द्वारा एनक्यूएएस प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए संबंधित अस्पताल के सभी प्रखंड चिकित्सा अधिकारी और प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक को बधाई दी है। इसके साथ ही प्रखंड अधिकारियों को अन्य अस्पतालों को एनक्यूएएस मानक के अनुरूप तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

राष्ट्रीय प्रमाणपत्र 03 साल तक के लिए मान्य, उसके बाद पुनः अस्पताल की होगी जांच :

सिविल सर्जन डॉ जितेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों को मिलने वाले स्वास्थ्य सुविधाओं की मूल्यांकन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणीकरण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अंतर्गत अस्पतालों में मरीजों के लिए उपलब्ध सभी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य और केंद्र स्वास्थ्य विभाग को आवेदन किया जाता है। पहले राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों का मूल्यांकन करने के बाद राज्य प्रमाणपत्र जारी किया जाता है जिसके आधार पर अस्पताल को नेशनल प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जाता है। इसके बाद नेशनल स्वास्थ्य टीम द्वारा अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का मूल्यांकन करते हुए अस्पताल को अंक प्रदान किया जाता है।

राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित अस्पताल को 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त होने और राज्य एनक्यूएएस प्रमाणपत्र जारी होने के बाद उसे नेशनल स्वास्थ्य विभाग को अंकेक्षण के लिए आवेदन दिया जाता है। उसके बाद नेशनल टीम द्वारा अस्पताल का मूल्यांकन किया जाता है। नेशनल टीम द्वारा भी अस्पताल को 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त होने पर अस्पताल को एनक्यूएएस प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। नेशनल एनक्यूएएस प्रमाणपत्र मिलने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित अस्पताल को अगले 03 साल तक अस्पताल गुणवत्ता जारी रखने के लिए आवश्यक सहयोग राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्थानीय लोगों को अस्पताल में सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध हो सकेगी और लोग आसानी से इसका लाभ उठा सकते हैं।

Related posts

पटना विश्वविद्यालय के छात्रावासों में सघन छापेमारी, 8 गिरफ्तार!

दानापुर रेल उपखंड में विशेष अभियान, यात्रियों को सुरक्षा व सतर्कता का संदेश

प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन का ‘सेकेंड चांस’ अभियान : 22 स्कूलों की 381 अनुत्तीर्ण बालिकाओं को मिल रहा शैक्षणिक सहारा

error: