पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) पारा मेडिकल परीक्षा समिति और बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (Bihar University of Health Sciences—BUHS) के बीच जारी विवाद का खामियाज़ा राज्यभर के लगभग एक लाख छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। 2023–24 सत्र में नामांकन लेने वाले पारा मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी के छात्रों का प्रथम वर्ष की परीक्षा तक नहीं हो सका है। दो वर्ष बीतने के बाद भी परीक्षा फॉर्म तक जारी न होना हजारों छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है।
दो साल बीत गए, प्रथम वर्ष की परीक्षा तक नहीं हुई-
राज्य के करीब 500 संस्थानों में पारा मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी कोर्स में 2023–24 सत्र में लगभग 50,000 छात्रों ने नामांकन लिया था। इन सभी का विश्वविद्यालय में पंजीकरण हो चुका है, लेकिन परीक्षा की प्रक्रिया आज तक शुरू नहीं हो पाई है। इसी तरह 2024–25 सत्र में भी 50,000 से अधिक नए छात्र नामांकित हैं, जिन्हें भी अब सत्र में देरी का डर सताने लगा है।
छात्रों का विश्वविद्यालय पर हल्ला, कोई सुनने वाला नहीं-
परीक्षा में देरी को लेकर मंगलवार को एक बार फिर बड़ी संख्या में छात्र बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय पहुंचे। छात्रों ने एग्ज़ाम कंट्रोलर से मुलाकात की। अधिकारी ने साफ कहा कि कोर्ट का आदेश आने के बाद ही परीक्षा फॉर्म से संबंधित नोटिस जारी किया जाएगा। इस बयान के बाद छात्रों में निराशा का माहौल है। उनका कहना है कि वे लगातार विश्वविद्यालय के चक्कर लगा-लगा कर थक चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर उनके सवालों का समाधान नहीं हो रहा।
पारा मेडिकल परीक्षा समिति और BUHS के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर चल रही खींचतान का असर सीधे छात्रों पर पड़ रहा है। पिछले कई महीनों से दोनों संस्थानों के बीच परीक्षा संचालन को लेकर विवाद जारी है। इस विवाद के चलते परीक्षा फॉर्म जारी नहीं, परीक्षा तिथि तय नहीं, सत्र लगातार लेट, छात्रों का भविष्य अनिश्चित। वहीं दो वर्ष में प्रथम वर्ष की परीक्षा तक न होना छात्रों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। स्टूडेंट्स का कहना है कि इंटर्नशिप लेट होगी, नौकरी की प्रक्रिया प्रभावित होगी, उच्च शिक्षा के अवसर भी छिन सकते हैं। कई छात्रों ने इस मामले को सरकार के संज्ञान में लाने की मांग की है, ताकि विवाद सुलझे और परीक्षा जल्द से जल्द कराई जाए।
