बिहार

कहार के कंधे पर हुई बड़ी देवी मां की विदाई, भावविभोर श्रद्धालुओं ने दी अश्रुपूर्ण विदाई

फुलवारीशरीफ, अजीत। पटना के फुलवारी शरीफ में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केंद्र माने जाने वाले पेठिया बाजार स्थित बड़ी देवी दुर्गा स्थान की प्रतिमा का विसर्जन गुरुवार को अनूठे ढंग से हुआ. करीब सौ वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत बड़ी देवी जी की विदाई कहार कंधे पर की गई. कंधे पर प्रतिमा उठाकर नगर परिक्रमा के बाद प्रखंड शिव मंदिर तालाब में विसर्जन कराया गया.बड़ी देवी जी का मिलन संगत पर स्थित मां शीतला मंदिर में काली जी की प्रतिमा के साथ भी कराया गया.

इस दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं. पुष्प वर्षा करते हुए लोग मां को विदाई देते रहे और गगनभेदी जयकारे से वातावरण गूंजता रहा. बैंड-बाजों और झाड़-फाटक के साथ जब कहार कंधे पर बड़ी देवी जी की प्रतिमा लेकर निकले तो श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा.

नगर भ्रमण के दौरान चौराहे पर प्रतिमा की विशेष आरती उतारी गई. विदाई यात्रा में आसपास के सैकड़ों गांवों से लोग शामिल हुए. श्रद्धालुओं ने इसे कंधे पर विदाई की अनूठी परंपरा बताया।

विसर्जन यात्रा को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. डीएसपी सुशील कुमार सिंह, थाना अध्यक्ष मोहम्मद गुलाम शाहबाज आलम, रैपिड एक्शन फोर्स और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहे. सीआईडी के अधिकारी केशरी चंद और सुषमा कुमारी सहित कई पूजा समितियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

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गुरुवार दोपहर से ही फुलवारी शरीफ और आसपास की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया जो देर रात तक जारी रहा. दूसरे दिन भी रामनगर बोचा चक और किसान कॉलोनी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया. शिव मंदिर तालाब में विसर्जन के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे और तालाब को अस्थायी रूप से तैयार किया गया था।

दुर्गापूजा के समापन के साथ ही मंगलवार से ही विभिन्न पूजा समितियों ने धार्मिक रीति-रिवाज के बीच प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू कर दिया था. चुनौती कुआं, ईसापुर, कुरकुरी, बहादुरपुर, साकेत बिहार, चौहरमल नगर और खोजा इमली इलाके की प्रतिमाओं का विसर्जन फुलवारी शरीफ प्रखंड शिव मंदिर तालाब में हुआ।

वहीं, गौरीचक, संपतचक, परसा बाजार, जानीपुर और इलाही बाग की प्रतिमाओं का विसर्जन पुनपुन नदी और आसपास के तालाबों-पोखरों में कराया गया. रामकृष्ण नगर, जगनपुरा, खेमनीचक, बेऊर, अनीसाबाद, इतवारपुर और कुरथौल की कई बड़ी प्रतिमाओं को श्रद्धालु बैंड-बाजों के साथ गंगा घाट ले जाकर विसर्जित करते रहे। महिलाओं ने विदाई से पहले मां को खोंइछा चढ़ाया और विदाई गीत गाए. पंडालों से प्रतिमाओं को निकलते समय आयोजकों और श्रद्धालुओं के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी।

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