पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) आज राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष पर्यवेक्षक बालकृष्ण गोयल ने आदर्श केंद्रीय कारा बेउर,पटना का औचक निरीक्षण किया। कारा में उन्हें पहले गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया एवं काराधीक्षक के द्वारा पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।विशेष पर्यवेक्षक ने कारा के अंदर की सभी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।आज कारा में कुल 4207 बंदी आवासित थे जिसमें महिलाओं की संख्या 160 पायी गयी। 17 विदेशी बंदी भी कारा में पायी गयी।

विशेष पर्यवेक्षक ने पुस्तकालय का निरीक्षण किया जहाँ लगभग 5000 पुस्तकें बंदियों के लिये उपलब्ध होने की बात बतायी गयी।महिला खण्ड में महिला बंदियों से भी बात-चीत की एवं उनकी स्थिति का जायजा लिया।उनके स्वाथ्य की जानकारी ली एवं महिला वार्ड में स्थित चिकित्सालय जाकर चिकित्सिका एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से भी जानकारी ली एवं कई निदेश दिए। महिला बंदियों के छोटे-छोटे बच्चों के टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया तथा इसे सुनिश्चित कराने के आदेश दिए।
निरीक्षण के क्रम में उन्होंने पुरुष चिकित्सालय जाकर चिकिसकों से बात-चीत की तथा वहाँ उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों का बेहतर उपयोग ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिले इसके निदेश दिए। कारा स्थित रोडियो दोस्त केंद्र को देखा जहाँ से बंदियों को सूचना,खबर एवं मनोरंजन किया जाता है।मुलाकाती कक्ष में जाली हटाकर सिर्फ ग्लास दीवार रखने की सलाह दी गयी ताकि सामने बाले का चेहरा देख कर इंटर-कॉम से बात हो सके।
कारा में नायलेट के द्वारा बंदियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था को देखा।उन्होंने रोजगारपरक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया ताकि जेल से बाहर होते ही कोई रोजगार तुरत बिना पूंजी के शुरू किया जा सके। कारा के बंदियों के द्वारा कारा के अंदर कई किचेन की सामग्री को तैयार किया जाता है जिसे मुक्ति ब्रांड से बाजार में उपलब्ध कराया जाता है।
निरीक्षण के क्रम में विशेष पर्यवेक्षक के साथ उपमहानिरीक्षक-सह- अधीक्षक आदर्श केंद्रीय कारा नीरज कुमार झा,उपाधीक्षक अजय कुमार,सहायक अधीक्षक मनीष,अभिषेक,कुंदन सीतेश तथा सहायक निदेशक बाल संरक्षण शैलेन्द्र कुमार चौधरी उपस्थित रहे। विशेष पर्यवेक्षक ने अपने निरीक्षण भ्रमण के क्रम में गुलजारबाग स्थित वृद्धाश्रम का भी दौरा किया।वहाँ जाकर उन्होंने किचेन सामग्री का अवलोकन किया जहां उन्होंने एक्सपायर्ड दूध उपलब्ध पाया।उन्होंने वृद्धाश्रम संचालक हेल्प ऐज इंडिया को सख्त निदेश दिया कि ये लचर व्यवस्था बर्दास्त के काबिल नहीं है।
