पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व स्नातकोत्तर विभाग में आज दिनांक 31 जनवरी 2026 को पी.एच.डी. कार्यक्रम में नव आगंतुक शोधार्थियों के लिए इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. कनक भूषण मिश्रा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह विभाग के लिए गौरव का क्षण है, क्योंकि आज से विभाग में पी.एच.डी. कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ है।
उन्होंने बताया कि विभाग में स्नातकोत्तर कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी और चार वर्षों के भीतर वर्ष 2026 से पी.एच.डी. कार्यक्रम का आरंभ होना विभाग की शैक्षणिक प्रगति को दर्शाता है। इससे अब प्राचीन इतिहास के विद्यार्थियों को शोध के लिए अन्य विश्वविद्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इंडक्शन प्रोग्राम का उद्देश्य शोधार्थियों को विभागीय शैक्षणिक संरचना, शोध नियमावली, अनुसंधान पद्धति एवं विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति से परिचित कराना है। विभाग में कुल 20 शोध छात्र-छात्राओं का नामांकन हुआ है, जिन्हें यूजीसी गाइडलाइंस के अनुसार छह माह का प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क करना होगा, जिसमें उत्तीर्ण होने के बाद ही वे शोध कार्य प्रारंभ कर सकेंगे।
कार्यक्रम का संचालन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तृप्ति राय ने किया। उन्होंने पी.एच.डी. कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क की पाठ्यक्रम संरचना, शोध की नैतिकता, संदर्भ सामग्री के उपयोग, फील्डवर्क, प्रकाशन प्रक्रिया एवं शोधार्थियों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही विषय चयन, अभिलेखीय एवं पुरातात्त्विक साक्ष्यों के महत्व तथा अंतर्विषयक शोध दृष्टिकोण पर मार्गदर्शन प्रदान किया। विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रीति गुप्ता ने अपने उद्बोधन में मौलिक एवं गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य करने के लिए शोधार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने यूजीसी के नए मापदंडों के अनुरूप शोध करने पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय में शोध की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। इंडक्शन प्रोग्राम के अंत में शोधार्थियों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने अपने प्रश्न रखे। इस अवसर पर बी.डी. कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर नीतू तिवारी, एस.पी.एम. कॉलेज, बिहार शरीफ के असिस्टेंट प्रोफेसर आशीष कुमार सहित अन्य शोधार्थियों की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।
