पूर्णिया(न्यूज क्राइम 24): 17 जून । हाथीपांव के साथ जीवन बोझिल महसूस होता है। यह आवश्यक है कि मरीज फ़ाइलेरिया का प्रबंधन कैसे हो इसके बारे में जाने और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाये। फाइलेरिया उन्मूलन मुहिम को लेकर जिले में स्वास्थ्य विभाग सजग है। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। एक तरफ जहां जिलेभर में फाइलेरिया क्लीनिक एमएमडीपी की शुरुआत की जा रही है। वहीं अब 19 जून से जिले में प्रखंड स्तर पर नाइट ब्लड सर्वे का काम शुरू किया जाएगा। जिसमें पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के स्थानीय लोग भी जागरूकता अभियान में शामिल होकर रक्त जांच करवाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं |
सपोर्ट ग्रुप के सदस्यों ने स्लोगन लिखकर आस पास के लोगों को आगामी नाइट ब्लड सर्वे में भाग लेने के लिए अपील की है। नाइट ब्लड सर्वे में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सदस्य कर रहे है आवश्यक सहयोग- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मंडल
-फाइलेरिया मरीजों को संबोधित करते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मंडल ने कहा कि पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सदस्य 19 जून से होने वाले नाइट ब्लड सर्वे अभियान में जन जागरूकता के लिए कसबा , पूर्णिया पूर्व एवं के नगर प्रखंड में विभाग का सहयोग कर रहे हैं।
पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सदस्यों ने अपने आस पास के लोगों को जागरूक कर व अपने अनुभवों को साझा कर सभी संभावित मरीजों को नाइट ब्लड सर्वे अभियान में सहयोग करने की अपील की है ।साथ ही अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाने का भी प्रयास कर रहे हैं|लोगों से अपील कर रहे कि फाइलेरिया से सुरक्षा के लिए सबसे प्रमुख हर साल सर्वजन दवा सेवन अभियान के दौरान डीईसी व अल्बेंडाजोल की गोली का सेवन जरूर करें तथा अपने परिवार के लोगों को भी खाने के लिए कहें। उन्होंने बताया कि साल में एक बार तथा पांच साल तक लगातार इस दवा के सेवन से इंसान आजीवन फाइलेरिया के संक्रमण से सुरक्षित रह सकता है।
प्रखंडों में फाइलेरिया की स्थिति पता चलेगा-
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मंडल ने कहा कि नाइट ब्लड सर्वे की गतिविधियों का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य प्रखंड स्तर पर फाइलेरिया व माइक्रो फाइलेरिया की दर को जानना है। नाइट ब्लड सर्वे से यह पता चलेगा कि कितने लोगों में फाइलेरिया का पैरासाइट मौजूद है। फाइलेरिया का पारासाइट रात में ही सक्रिय होता है। इसलिए नाइट ब्लड सर्वे में 8-12 बजे रात के बीच ही ब्लड सैम्पल लिया जाता है। इसमें 20 साल से ऊपर के लोगों का रक्त नमूना जांच के लिए लिया जाएगा। जिससे पता चल सकेगा कि प्रखंडों में फाइलेरिया की स्थिति क्या है। उन्होंने बताया कि प्रखंड स्तर पर नाइट ब्लड सर्वे के लिए सूक्ष्म कार्य योजना तैयार की जा रही है।
फाइलेरिया एक घातक बीमारी है। ये साइलेंट रहकर शरीर को खराब करती है। – सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी, ने बताया कि फाइलेरिया के उन्मूलन के लिए डब्ल्यूएचओ, केयर इंडिया, सीफार एवं पीसीआई जैसी सहयोगी संगठनों द्वारा सामुदायिक स्तर पर सहयोग किया जा रहा है। इस अभियान को शत प्रतिशत सफ़ल बनाने के लिए ग्रामीण स्तर पर फाइलेरिया पेशेंट नेटवर्क भी सहयोग कर रहा है। यह काफी अच्छी पहल है। इससे आम लोगों में एक मजबूत संदेश प्रसारित हो रहा है। उन्होंने बताया कि लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए अधिक से अधिक लोगों के रक्त के नमूना संग्रह करने की जरूरत होगी। इससे फाइलेरिया उन्मूलन की राह आसान होगी। कहा कि फाइलेरिया या हाथी पांव के लक्षण सामान्यता शुरू में दिखाई नहीं देते हैं। इसके परजीवी शरीर में प्रवेश करने के बाद इसके लक्षण लगभग पांच से दस सालों बाद दिखाई दे सकते हैं।
इसलिए सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी इसकी जांच कराएं। फाइलेरिया एक घातक बीमारी है। ये साइलेंस रहकर शरीर को खराब करती है। फाइलेरिया एक परजीवी रोग है जो एक कृमि जनित मच्छर से फैलने वाला रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। आमतौर पर फाइलेरिया के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसील (अंडकोषों की सूजन) फाइलेरिया के लक्षण हैं। फाइलेरिया हो जाने के बाद धीरे-धीरे यह गंभीर रूप लेने लगता है। इसका कोई ठोस इलाज नहीं है, लेकिन इसकी नियमित और उचित देखभाल कर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
