बिहार

एसडीओ शैलजा पांडे के निर्देश पर दुकानदारों को दुकान हटाने का दिया आदेश

फारबिसगंज, (न्यूज़ क्राइम 24) बीते दिनों शनिवार को अनुमंडल न्यायालय परिसर फारबिसगंज में एसडीओ शैलजा पांडे के निर्देश पर अतिक्रमण मुक्ति अभियान शुरू किया गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। इस अभियान के तहत लगभग एक दर्जन अतिक्रमित दुकानों को बंद कराया गया। इसके पूर्व दुकानदारों को 10 दिनों का समय दिया गया था लेकिन फिर भी उनके द्वारा अपना दुकान नही हटाने के कारण बुलडोजर की मदद से दुकान और गुमटी को हटाया गया शुक्रवार को दुकानों को बंद करवाया गया था यदि वे निर्धारित समय के भीतर दुकानों को नहीं हटाते हैं, तो प्रशासन ने उन्हें उजारने की चेतावनी दी इसी क्रम में आज दुकानों को जेसीबी की मदद से अग्रेतर कार्रवाई करते हुए हटवाया गया है अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकार कुमार आलोक एवं एडिशनल एसएचओ आदित्य किरण समेत बड़ी संख्या में पुलिस के जवान मौजूद थे।

यह भी बताय गया कि अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों में एक स्टांप वेंडर की गुमटी भी शामिल थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अनुमंडल व्यवहार न्यायालय और अनुमंडल कार्यालय परिसर को अतिक्रमण मुक्त करना उनका प्राथमिक लक्ष्य है। दुकानदारों ने प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ अपनी दिक्कतें साझा कीं उन्होंने बताया कि वे न्यायालय के अधिवक्ताओं और मुव्वकीलों की सेवा के लिए यहां दुकान लगाते हैं,और इसी के माध्यम से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। उनका तर्क है कि उनकी उपस्थिति से किसी को नुकसान या परेशानी नहीं हो रही है। लेकिन प्रशासन के आदेश के बाद अब उन्हें नया स्थान ढूंढने की चिंता सता रही है। कई दुकानदारों ने अपने हालात को लेकर अधिकारियों के सामने रोने-गिड़गिड़ाने की भी कोशिश की, लेकिन उनकी गुहार बेकार गई।

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एडवोकेट राहुल रंजन ने बतलाया कि है कि इसके पूर्व अतिक्रमण को हटाने के लिए पूर्व में भी कई बार शिकायतें की गई थीं। प्रशासन ने पहले ही दुकानदारों को दुकान खाली करने के लिए नोटिस दिए थे, लेकिन दुकानदारों ने कोई उचित कदम नहीं उठाया। इसलिए प्रशासन को अतिक्रमण मुक्ति अभियान चलाने का निर्णय लेना पड़ा। इस अभियान का उद्देश्य न केवल न्यायालय परिसर को अतिक्रमण मुक्त करना है, बल्कि क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली परेशानियों और व्यवधानों को भी दूर करना है।अगर सोमवार तक भी अगर दुकानदार अपनी दुकानों को नहीं हटाते हैं, तो प्रशासन कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है। अब देखना यह होगा कि क्या दुकानदार समय पर अपनी दुकानों को हटाने में सफल होते हैं या उन्हें प्रशासन की कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा

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