पटना। राजधानी पटना में मंगलवार को बिहार राजस्व सेवा से जुड़े अधिकारियों का बड़ा महाजुटान देखने को मिला। गायघाट स्थित केएल-7 बैंक्वेट हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों राजस्व अधिकारी और सेवानिवृत्त सदस्य शामिल हुए। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो कुछ ही देर में जनसैलाब में तब्दील हो गई। महाजुटान के दौरान अधिकारियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। एसोसिएशन के अध्यक्ष आदित्य ने बताया की आंदोलन पिछले 23 दिनों से लगातार जारी है और अब इसे व्यापक समर्थन मिलने लगा है। कार्यक्रम में मौजूद पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान बिहार मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश राय ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि राजस्व अधिकारियों की मांगें पूरी तरह जायज़ हैं और सरकार को इस पर जल्द निर्णय लेना चाहिए।
क्या हैं राजस्व अधिकारियों की प्रमुख मांगें?
राजस्व अधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से वेतन विसंगतियों को दूर कर वेतनमान में सुधार, पदोन्नति की स्पष्ट और नियमित व्यवस्था, कार्यभार के अनुसार पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति राजस्व कर्मियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर संरक्षण लंबित भत्तों एवं सुविधाओं का भुगतान एवं सेवा शर्तों में सुधार और स्थायित्व हैं।
अधिकारियों का आरोप है कि सरकार द्वारा उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। महाजुटान के मंच से अधिकारियों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की और चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल लोगों का कहना था कि यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की लड़ाई का बड़ा प्रदर्शन है।
