फुलवारीशरीफ, अजित। वर्षों की कानूनी लड़ाई, संघर्ष और धैर्य के बाद आखिरकार न्याय की जीत हुई है. पटना जिले के संपतचक प्रखंड अंतर्गत एकतापुरम (भोगीपुर) में निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी ग्रीन्स अपार्टमेंट परियोजना को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. इस परियोजना के लिए भूमि देने वाले स्वामी नागेश्वर सिंह स्वराज को अब पटना न्यायालय से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट के आदेशों की लगातार अनदेखी करने वाले बिल्डर मेसर्स रुक्मणी बिल्डटेक लिमिटेड के निदेशकों किसी संपत्ति जप्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं इसके लिए उन्हें नोटिस जारी किया गया है.तय अवधि में अगर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए तो संपत्ति जप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
बता दें क़ी यह मामला तब तूल पकड़ने लगा जब बिल्डर मेसर्स रुक्मणी बिल्डटेक लिमिटेड के निदेशकों – अजीत आजाद (पिता- नंदकिशोर ठाकुर, निवासी- सरोज ठाकुर, रैमा, सहारघाट, मधुबनी), राजीव ठाकुर (पिता- नंदकिशोर ठाकुर, निवासी- मनोज ठाकुर, रैमा, सहारघाट, मधुबनी) एवं अन्य ने आर्बिट्रेटर के स्पष्ट आदेश के बावजूद जमीन मालिक को मुआवज़ा राशि का भुगतान नहीं किया।
जमीन मालिक को 22 करोड़ 54 लाख 59 हजार 110 रुपये का मुआवज़ा मिलना था, जिसमें देरी होने पर 18% वार्षिक ब्याज भी लागू था. यह फैसला केस संख्या 68/2019 के तहत पटना उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश श्रीमान संजय करोल द्वारा नियुक्त पूर्व न्यायाधीश वी. एन. सिन्हा ने 29 महीनों तक दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 11 दिसंबर 2022 को सुनाया था. 69 पेज की इस ऐतिहासिक रिपोर्ट में न्यायाधीश ने बिना भूमि स्वामी की सहमति के की गई रजिस्ट्री को अवैध करार दिया था।
बावजूद इसके, बिल्डर द्वारा आदेशों की अनदेखी की जाती रही. अंततः पटना न्यायालय ने अब सख्त रुख अपनाते हुए सभी संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अदालत ने बिल्डर निदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया तो संपत्ति की जब्ती की कार्रवाई कानूनी रूप से लागू की जाएगी।
इससे पहले, बिल्डरों की लगातार अनदेखी और अदालत की अवमानना के चलते न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. मधुबनी पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक आरोपी निदेशक राजीव ठाकुर को भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार कर पटना जेल भेजा गया था।
पीड़ित भूमि स्वामी के अधिवक्ता सत्यप्रकाश नारायण ने बताया कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे राज्य के उन हजारों किसानों और जमीन मालिकों की जीत है, जिनकी संपत्ति पर वर्षों से ऐसे बिल्डर मनमानी कर रहे हैं। इस आदेश से न केवल स्थानीय भू-स्वामियों और किसानों में न्याय की नई उम्मीद जगी है, बल्कि ऐसे डेवलपरों को भी सख्त संदेश मिला है कि अब कानूनी आदेशों की अनदेखी कर पाना आसान नहीं होगा।
न्यायालय के इस फैसले से भावुक हुए नागेश्वर सिंह स्वराज ने कहा – “हमने वर्षों इंतज़ार किया, अपमान सहा, दर-दर भटके. लेकिन आज अदालत ने हमें फिर से इंसाफ पर विश्वास दिलाया है. यह फैसला हमारे जैसे सैकड़ों पीड़ितों की आवाज़ बनेगा। इस पूरे मामले ने अब एक नज़ीर का रूप ले लिया है, जिसमें वैकल्पिक विवाद निपटारा प्रणाली (आर्बिट्रेशन), न्यायिक हस्तक्षेप और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से एक साधारण नागरिक को न्याय मिला है।
