पटनासिटी(न्यूज क्राइम 24): भारत की पहली स्नातक और महिला फिजिशियन होने का गौरव सिर्फ़ बिहार को प्राप्त है। इनका जन्म 18 जुलाई 1861 में भागलपुर बिहार में हुआ था । इन्होंने भारतीय महिलाओं के शिक्षा के विकास के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। बच्चियों को शिक्षा के साथ उनके विद्यालयों में ही गृह उद्योग स्थापित करने के कार्य को प्रश्रय दिया । रूढ़िवादी समाज ने इनको भी नहीं छोड़ा । एक बंगबाशी पात्रिका में इन्हें वेश्या तक कहा और लिखा गया , जिसके संपादक महेश पाल को 6 महीने के लिए जेल की हवा खानी पड़ी थी।
ये बातें आज जंगली प्रसाद लेन स्थित स्वरांजलि सभागार में कादम्बिनी गांगुली की जयंती पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षविद डा. ध्रुव कुमार ने कही। संयोजक अनिल रश्मि ने कहा बिहार की ऐसी महानतम विभूति को आज की नई पीढ़ी नहीं जानती है , खासकर बच्चियों और महिलाओं के ” प्रेरणा – प्रतिक ” के रूप में स्कूली पाठ्यक्रम में राज्य सरकार को शामिल करना चाहिए ,तभी इनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम सभी मांग करते हैं । इस महान विभूति ने 62 वर्ष की उम्र में 3 अक्टूबर 1923 को संसार से अमृत – सफर की ओर चल पड़ी प्रारम्भ में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। मौके पर नितिन कुमार वर्मा, शिक्षाविद नेक आलम, राजा पुट्टू , सुनीता रानी, डा. शीला कुमारी, विनीता
कुमारी ने भी अपने उदगार व्यक्त किये। इस आशय की जानकारी मीडिया प्रभारी जितेंद्र कुमार पाल नें दी।
