बिहार

इस्लामी न्याय व्यवस्था के बिना इस्लामी जीवन की कल्पना नहीं : अमीर-ए-शरिया

फुलवारीशरीफ, अजीत। बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अमीर-ए-शरिया हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने कहा कि ईमान के बाद समाज में न्याय और निष्पक्षता की व्यवस्था कायम करना महत्वपूर्ण धार्मिक और राष्ट्रीय दायित्व है. इसके बिना इस्लामी जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने ये बातें झारखंड के पाकुड़ स्थित जामिया इस्लामिया महेशपुर में दार-उल-कजा के उद्घाटन के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि दार-उल-कजा की स्थापना का उद्देश्य लोगों के आपसी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान और न्याय दिलाना है. इस मौके पर उन्होंने सनद-ए-कजा और कार-ए-कजा की जिम्मेदारी भी सौंपी. उन्होंने कहा कि जो लोग अल्लाह की एकता, पैगंबर मोहम्मद की पैगंबरी तथा कुरान और सुन्नत पर विश्वास रखते हैं, उनके लिए जीवन को शरिया और सुन्नत के अनुरूप ढालना जरूरी है।

शरिया अमारत के नाजिम मौलाना मुफ्ती सईद-उर-रहमान कासमी ने दार-उल-कजा की शरई स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां शरिया के अनुसार मामलों की जांच कर समाधान का प्रयास किया जाता है. उन्होंने धार्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने और मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया।

अध्यक्ष काजी शरिया मौलाना मुहम्मद अनजर आलम कासमी ने कहा कि पाकुड़ क्षेत्र में दार-उल-कजा की स्थापना की मांग लंबे समय से थी. उप-नाजिम मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सोहराब नदवी ने युवाओं में बढ़ती अनैतिकता पर चिंता जताते हुए विवाह में फिजूलखर्ची से बचने की अपील की।

उप-काजी शरिया मौलाना साहिल अख्तर कासमी ने कहा कि दार-उल-कजा के माध्यम से कम खर्च और कम समय में विवादों का समाधान हो सकता है. सहायक काजी शरिया मौलाना मुफ्ती मुजीब-उर-रहमान कासमी ने बताया कि अमारत शरिया के दार-उल-कजा के माध्यम से अब तक सैकड़ों मामलों का निपटारा किया गया है। कार्यक्रम में स्थानीय उलेमा ने पाकुड़ में दार-उल-कजा की स्थापना को समय की जरूरत बताया. अंत में अमीर-ए-शरिया की दुआ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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