बिहार

एम्स पटना में “स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता” विषय पर इंटरैक्टिव सत्र, अनुसंधान से उपचार तक एआई की भूमिका पर चर्चा

फुलवारीशरीफ, अजित। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना में “स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता : अनुसंधान से उपचार तक” विषय पर एक इंटरैक्टिव शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में इसके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई. इस अवसर पर चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, प्रशासकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लेकर स्वास्थ्य प्रणाली में एआई के समावेशन और इसके माध्यम से रोगी देखभाल, नैदानिक निर्णय-निर्माण तथा चिकित्सा अनुसंधान को मजबूत बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम की शुरुआत “स्वास्थ्य सेवा में एआई: चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और नेतृत्व के दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा से हुई. इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एम्स पटना ने की. उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकें निदान की सटीकता बढ़ाने, अस्पताल की कार्यप्रणालियों को सुव्यवस्थित करने और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. इससे रोगी-केंद्रित और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकती हैं।

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पैनल चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के व्यावहारिक उपयोग पर अपने विचार साझा किए. डॉ. रितेश आर. धोटे, वैज्ञानिक-ई, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) पटना ने उभरती एआई तकनीकों और उनके स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म में बढ़ते उपयोग पर चर्चा की. डॉ. अभ्युदय कुमार, फैकल्टी इंचार्ज (आईटी एवं एचआईएस), एम्स पटना ने एआई आधारित क्लिनिकल निर्णय-समर्थन प्रणाली को सक्षम बनाने में डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना और हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम की भूमिका पर प्रकाश डाला. वहीं डॉ. नीरज कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, एम्स पटना ने एआई के नैदानिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए बताया कि यह तकनीक प्रारंभिक रोग पहचान, जोखिम आकलन और व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने में चिकित्सकों की मदद कर सकती है. सत्र का संचालन डॉ. पल्लम गोपी चंद, उप-फैकल्टी इंचार्ज (आईटी एवं एचआईएस), एम्स पटना ने किया। पैनल चर्चा के बाद सी-डैक के विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. इस दौरान श्री जयेश दुबे ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मूल सिद्धांतों और आधारभूत अवधारणाओं पर प्रस्तुति दी. उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग मॉडल किस प्रकार बड़े पैमाने पर उपलब्ध स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण कर चिकित्सकीय निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के परिणामों को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि एआई तकनीक का उपयोग पहले से ही मेडिकल इमेजिंग विश्लेषण, गंभीर रोगियों की देखभाल में पूर्वानुमान विश्लेषण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, दवा अनुसंधान और व्यक्तिगत चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई के उपयोग के दौरान नैतिक मानकों का पालन, रोगी डेटा की गोपनीयता की सुरक्षा और राष्ट्रीय नियामकीय दिशानिर्देशों का अनुपालन अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें चिकित्सकों, डेटा वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच अंतरविषयी सहयोग के महत्व पर बल दिया गया. प्रतिभागियों ने कहा कि बदलते डिजिटल स्वास्थ्य परिदृश्य के अनुरूप भविष्य के स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने के लिए चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और क्लिनिकल प्रैक्टिस में एआई का समावेश आवश्यक है।

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