बिहार

सिविल सर्जन की अध्यक्षता में पोषण पुनर्वास केंद्र की अर्द्धवार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित

पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं द्वारा मेडिकल सहायता के साथ साथ पर्याप्त पोषण का उपयोग नहीं करने से नवजात शिशु कुपोषित से ग्रसित हो जाते हैं। कुपोषित बच्चों की समय से पहचान करते हुए चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) का संचालन किया जाता है। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा संबंधित क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की पहचान करते हुए उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजकर सुपोषित करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया की अध्यक्षता में अर्द्धवार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में सभी प्रखंड के स्वास्थ्य और आईसीडीएस अधिकारियों को अपने क्षेत्र के कुपोषित बच्चों की पहचान करते हुए उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेज कर सुपोषित करने का आवश्यक निर्देश दिया गया।

इस दौरान सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया के साथ एसीएमओ डॉ. आर पी मंडल, आईसीडीएस डीपीओ अनिता कुमारी, मेडिकल कॉलेज शिशु विशेषज्ञ डॉ प्रेम प्रकाश, यूनिसेफ राज्य अधिकारी डॉ राजेश कुमार और गगन गौतम, सीडीओ डॉ कृष्ण मोहन दास, डीसीएम संजय कुमार दिनकर, डीपीसी डॉ सुधांशु शेखर, डीएमएनई आलोक कुमार, डीसीक्यूए डॉ अनिल कुमार शर्मा, यूनिसेफ जिला कन्सल्टेंट निधि भारती, अमित कुमार, पिरामल जिला लीड चंदन कुमार, एफपीसी सनत गुहा के साथ पोषण पुनर्वास केंद्र के अधिकारी, सभी प्रखंड के बीसीएम, आईसीडीएस सीडीपीओ और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

कुपोषित बच्चों की पहचान कर पुनर्वास केंद्र भेजने का दिया गया निर्देश :

समीक्षा बैठक में सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया द्वारा सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्र के कुपोषित बच्चों की पहचान करते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सकीय सहायता और पोषण के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने का निर्देश दिया गया। सिविल सर्जन ने कहा कि कुपोषित बच्चों को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) कैम्पस में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) का संचालन किया जा रहा है जिसमें उम्र के अनुसार बच्चों के वजन में वृद्धि नहीं होने पर मेडिकल सहायता प्रदान किया जाता है। एनआरसी में शिशु विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ साथ पोषण विशेषज्ञ भी उपलब्ध रहते हैं जिसके सहयोग से बच्चों को मेडिकल सहायता और संतुलित पोषण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है जिसके उपयोग से बच्चों को स्वस्थ और सुपोषित किया जाता है।

सिविल सर्जन ने कहा कि जन्म के बाद बच्चों के वजन और 01 महीने के अंदर बच्चों के पोषण विकास का मूल्यांकन करते हुए कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजकर चिकित्सकों की निगरानी द्वारा सुपोषित किया जा सकता है। पोषण पुनर्वास केंद्र में 01 महीने से 59 महीने के बच्चों को भर्ती करते हुए उन्हें सुपोषित किया जा सकता है। सभी बीसीएम और आईसीडीएस सीडीपीओ अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में कार्यरत आशा व सेविका कर्मियों द्वारा ऐसे बच्चों की पहचान करवाते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भेजवाना सुनिश्चित करना चाहिए ताकि बच्चों को सही समय में चिकित्सकों द्वारा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

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कुपोषित बच्चों के सुरक्षित करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में उपलब्ध रहते हैं आवश्यक चिकित्सक और कर्मी :

कुपोषित बच्चों का इलाज करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सक और पोषण अधिकारी उपस्थित रहते हैं। इसके लिए पूर्णिया पोषण पुनर्वास केंद्र में 06 मेडिकल अधिकारी, 06 एएनएम/नर्सिंग स्टाफ, 01 पोषण विशेषज्ञ, 02 रसोई कर्मी, 01 अस्पताल क्लीनर उपस्थित रहते हैं। उनके द्वारा उपस्थित बच्चों को समय समय पर आवश्यक पोषण के साथ साथ मेडिकल सहायता प्रदान किया जाता है। कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में आवश्यक मेडिसिन के साथ पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराई जाती है। बेहतर पोषण के लिए बच्चों को पोषण विशेषज्ञ की उपस्थिति में आवश्यक फल, दलिया, हलवा, खिचड़ी, अंडा, दूध से निर्मित पोषण सामग्री, साबूदाना का खीर, मुर्मुरा पाउडर-तेल और चीनी के साथ बना हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के खेलने की व्यवस्था भी उपलब्ध रहती है जिससे कि बच्चों का निर्धारित समय में आवश्यक विकास सुनिश्चित करते हुए सुपोषित किया जाता है।

कुपोषित बच्चों के इलाज के दौरान एक परिजनों को भी अस्पताल में रहने की व्यवस्था, उपलब्ध कराई जाती है पोषण सुविधा : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने कहा कि पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों के इलाज के दौरान अस्पताल में उनके एक परिजनों को भी रहने की सुविधा उपलब्ध रहती है। अस्पताल में बच्चों के साथ साथ उनके परिजनों को भी पोषण सुविधा उपलब्ध कराते हुए बच्चों को घर में रहने पर सही पोषण का उपयोग करने की जानकारी दी जाती है। अस्पताल में उपस्थित परिजनों को भी नाश्ता में सुबह पावरोटी, अंडा, दूध और मौसमी फल, खाना में दोपहर में चावल, दाल, सब्जी और दही, शाम को नाश्ते में चाय और बिस्कुट तथा रात में भोजन के रूप में रोटी, दाल और सब्जी उपलब्ध कराई जाती है। बच्चों के साथ अस्पताल में एक परिजनों को रहने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिजनों को प्रतिदिन के अनुसार सहयोग राशि भी लाभार्थी के बैंक खाते में उपलब्ध कराई जाती है। पोषण पुनर्वास केंद्र के ठीक होने के बाद भी बच्चों को 04 बार फॉलोअप के लिए अस्पताल बुलाया जाता है और उनके पोषण स्थिति की स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जानकारी ली जाती है। इसलिए सभी अधिकारियों द्वारा संबंधित प्रखंड से कुपोषित बच्चों की पहचान कर बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भेजना सुनिश्चित करना है।

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