फुलवारीशरीफ, अजित। पटना सिविल कोर्ट में एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक और कानूनी हलकों में हलचल पैदा कर दी है. न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) बगीशा सुशैन की अदालत ने पूर्व डीसीएलआर मैत्री सिंह, लंघौरा रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक उनके पिता लाल नारायण सिंह तथा ममेरे भाई कान्तेश रंजन उर्फ पिंकु के खिलाफ दायर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को सम्मन जारी कर 24 अप्रैल को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मामला पटना जिले के संपतचक प्रखंड अंतर्गत एकतापुरम भोगीपुर स्थित छत्रपति शिवाजी ग्रींस अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर ए-1/603 से संबंधित है. शिकायत के अनुसार उक्त फ्लैट को लेकर कथित तौर पर फर्जीवाड़ा, साजिश और दबाव बनाकर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता सत्यप्रकाश नारायण के अनुसार अपार्टमेंट निर्माणकर्ता बिल्डर कंपनी मे० रुक्मणी बिल्डटेक के निदेशकों तथा अपने आवासीय फ्लैट से संचालित मे० लंघौरा रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड से साठगांठ कर पूर्व डीसीएलआर मैत्री सिंह ने एक सोची-समझी साजिश के तहत अपने जमीन कारोबारी ममेरे भाई कान्तेश रंजन उर्फ पिंकु को फर्जी शेयर डिस्ट्रिब्यूशन दस्तावेजों के आधार पर फ्लैट का मालिक दर्शाया. इसके बाद उक्त फ्लैट की रजिस्ट्री अपने पिता लाल नारायण सिंह के नाम कराई गई।
मामला उजागर होने के पश्चात आरोपियों द्वारा वैध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के अनुसार फ्लैट नंबर ए-1/603 के असली मालिक नागेश्वर सिंह स्वराज पर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया. जब पीड़ित शिकायतकर्ता ने इस फर्जीवाड़े का विरोध किया तो उन्हें डराने-धमकाने के साथ मारपीट तक का सामना करना पड़ा और जबरन दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश की गई। अब यह मुद्दा न केवल कानूनी बल्कि प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है. संपत्ति से जुड़े मामलों में फर्जी दस्तावेज, दबाव और साजिश जैसे आरोपों ने आम लोगों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है. फिलहाल सभी की निगाहें अब अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
