पटना, न्यूज क्राइम 24। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और बिहार के पूर्व मंत्री डॉ भीम सिंह ने आज ग्राम कचहरी के प्रति सरकार की उदासीनता पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बिहार के ग्राम पंचायतों में ग्राम कचहरी एक यूनिक व्यवस्था है, लेकिन दुर्भाग्य है कि इसके पास न कार्य है, न कोष है और न ही कर्मी है, जिस कारण या व्यवस्था पंगु हो गई है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री श्री सिंह ने कहा कि सरकार एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय में एफिडेविट देकर कहती है कि ग्राम कचहरी अच्छा काम कर रही है। लेकिन सरकार की उदासीनता से यह मृतप्राय हो गई है।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज अधिनियम 2006 के तहत ग्राम कचहरियों को कतिपय अधिकार दिए गए है। विशेष कानून के तहत तथा आईपीसी की 40 धाराओं के तहत उनको अधिकार दिया गया है। ग्राम कचहरियों के अधिकारों में बढ़ोतरी होनी चाहिए , लेकिन जो अधिकार दिए गए उसे भी कार्यान्वित करने की वग्वस्था नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि ग्राम कचहरियों में सैकड़ों पद रिक्त हैं। निर्विरोध चुने जाने की स्थिति में भी लोग नामांकन नहीं कर रहे। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि लोगों में ग्राम कचहरी को लेकर उत्साह नहीं है क्योंकि यहां न कार्य है, न कोष है और न ही कर्मी हैं।
बिहार के पूर्व मंत्री श्री सिंह ने कहा कि आज प्रदेश के पंच , सरपंच और उप सरपंच अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो 12 जनवरी को सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। सरकार उनसे 31 दिसंबर तक समय मांगी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 1.25 लाख जनप्रतिनिधि आंदोलनरत हैं और इस्तीफा देने की तैयारी में हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार से मांग करती है कि आंदोलनरत पंच, सरपंच, उप सरपंच के संघ को सरकार वार्ता के लिए बुलाए और उनकी समस्या के समाधान की कोशिश करे।
श्री सिंह ने कहा कि 10 साल पूर्व 13 दिसंबर 2013 को सरकार ने ग्राम कचहरी में सुधार के लिए 20 सूत्री कार्य योजना बनाई थी और इसकी घोषणा सदन में की गई थी, लेकिन दावा है कि इसमें एक भी पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इसके तहत पगड़ी देने, मानदेय बढ़ाने, इंश्योरेंस कराने तक की व्यवस्था देने की बात थी।
उन्होंने साफ लहजे में कहा कि अगर ग्राम कचहरी की व्यवस्था सही हो तो न्यायालयों पर बोझ कम होगा, लेकिन यह सरकार अक्षम है और हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि अगर 12 जनवरी को इतनी बड़ी संख्या में जन प्रतिनिधि इस्तीफा दे देंगे तो प्रदेश में वैधानिक संकट उत्पन्न हो जाएग। इस प्रेस वार्ता में प्रदेश मंत्री अनिल ठाकुर, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अमित प्रकाश बबलू, प्रभात मालाकार और सूरज पांडेय उपस्थित रहे।
