पटना, अजित। बिहार सरकार की पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की मंत्री रेणु देवी तमिलनाडु के मदुरै में आयोजित फिशरीज समर मीट 2024 में बिहार के विकास के बारे में चर्चा की. मंत्री ने वहां बताया कि कैसे बिहार के किसान पशुपालक मत्स्य पालक बिहार सरकार की नीतियों पर चलकर विकसित बिहार बनाने में लगे हुए हैं. उन्होंने बताया कि बिहार में अब बाहर से मछली नहीं मंगाया जाता है. बिहार के ही मछली उत्पादन से बिहार में मछली उत्पादन की खपत को पूरा कर लिया जाता है.मंत्री द्वारा बताया गया कि बिहार राज्य में विविध मत्स्य संपदाओं की बहुलता है तथा इन मत्स्य संपदाओं में मात्स्यिकी एवं जल कृषि के विकास की असीम सम्भावनाएँ हैं. वर्ष 2008 के पहले अन्य राज्यों से मछलियों का आयात बिहार राज्य में होता था किन्तु, बिहार सरकार के द्वारा वर्ष 2008 में कृषि रोडमैप तैयार किया गया तथा मात्स्यिकी प्रक्षेत्र में गुणोत्तर प्रगति के कारण बिहार राज्य में मछली उत्पादन एवं खपत लगभग समान हो गया.परिणामस्वरूप बिहार राज्य में अन्य राज्यों से मछली का आयात लगभग नगण्य हो गया है. वित्तीय वर्ष 2022-23 में 8.46 लाख मिट्रीक टन मछली का उत्पादन हुआ था जो वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़कर 8.73 लाख मिट्रीक टन हो गया है।
बिहार राज्य में निजी क्षेत्र में योजनान्तर्गत कुल 207 मत्स्य बीज हैचरी का अधिष्ठापन किया गया है.वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1800 मिलियन मत्स्य बीज के लक्ष्य के विरूद्ध विभिन्न श्रोतों से लगभग 1810 मिलियन मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ है.राज्य में अबतक कुल 55809 मत्स्य कृषकों को राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षित किया गया है।
मंत्री द्वारा बताया गया कि बिहार सरकार की राज्य योजना एवं सात निश्चय- 2 के तहत कई महत्वाकांक्षी मात्स्यिकी विकास की योजनाओं यथा तालाब निर्माण की योजना, मत्स्य हैचरी निर्माण की योजना, मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास योजना, मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना, बायोफ्लॉक एवं आर०ए०एस० आधारित मत्स्य पालन की योजना, खुली जलश्रोत में पैन आधारित जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना, राज्य के गंगानदी तंत्र में नदी पुर्नस्थापन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना, पठारी क्षेत्र तालाब निर्माण आधारित मत्स्य पालन की योजना, अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभुकों के लिये मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विशेष सहायता योजना, निजी तालाब के जीर्णोद्धार की योजना इत्यादि का क्रियान्वयन किया जा रहा है. राज्य के जलाशयों में केज एवं पैन आधारित मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा बिहार राज्य जलाशय मात्स्यिकी नीति की स्वीकृति प्रदान की गई है।
माननीया मंत्री द्वारा बताया गया कि राज्य योजना एवं सात निश्चय 2 अन्तर्गत योजनाओं के क्रियान्वयन के फलस्वरूप उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की गई है यथा मुख्यमंत्री चौर विकास योजनान्तर्गत 843 हेक्टेयर चौर भूमि विकसित किया जा चुका है.मंत्री द्वारा बताया गया कि केन्द्र प्रायोजित योजनान्तर्गत मात्स्यिकी के समग्र विकास हेतु प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना संचालित है.इस योजनान्तर्गत मात्स्यिकी विकास एवं मात्स्यिकी आधारभूत संरचनाओं के विकास हेतु कुल 33 अवयवों के तहत 14 मत्स्य हैचरी का निर्माण 451 हेक्टेयर में रियरिंग/तालाब का निर्माण, 188 बायोफ्लौक इकाई का अधिष्ठापन, 21 आ०ए०एस० इकाई का अधिष्ठापन, 54 केज कल्चर इकाई का अधिष्ठापन, 1090 हेक्टेयर जलाशय / आद्र जलक्षेत्र में बड़े आकार के मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन, 27 अलंकारी मछलियों का संवर्द्धन इकाई का अधिष्ठापन, 12633 मछुआरों को राहत-सह-बचत योजना से आच्छादित सामूहिक दुर्घटना बीमा योजनान्तर्गत डेढ़ लाख मछुआरा / कृषक को आच्छादित, 04 रेफरीजेटेड वाहन का वितरण, 21 फीडमिल का अधिष्ठापन, 03 रिक्रीयेशनल मात्स्यिकी, 09 आईस प्लांट/कोल्डस्टोरेज का निर्माण, 552 वाहनों का वितरण किया गया है।
मंत्री द्वारा बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत चतुर्थ कृषि रोडमैप के तहत वित्तीय वर्ष 2023-28 तक के लिये कुल 3022.00 करोड़ की योजना स्वीकृति हेतु प्रस्तावित है.मंत्री ने विशेष रूप से इस कार्यक्रम के आयोजन के लिये भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मंत्री राजीव रंजन सिंह, मंत्री, मत्स्य पालन, तमिलनाडू एवं अन्य महानुभावों को धन्यवाद दिया तथा उम्मीद जताई कि हमारे सभी मत्स्य कृषक बंधु के लिये यह कार्यक्रम मात्स्यिकी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों एवं अपार संभावनाओं को अंगीकार करने हेतु अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होगी।
