बिहार

दुर्गम रास्तों से गुजर कर ग्रामीणों के लिये टीकाकरण की राह आसान बना रही हैं एएनएम माधुरी

-बाढ़ प्रभावित फारबिसगंज के अम्हारा पंचायत में टीकाकरण को बढ़ावा देने का कर रही प्रयास
-घर की बहन-बेटी बन कर करती हूं लोगों से टीकाकरण की बात, स्नेह के आगे दम तोड़ देती हैं भ्रांतियां

अररिया(रंजीत ठाकुर): वैश्विक महामारी के इस दौर में हमारे स्वास्थ्य कर्मी कई भूमिकाओं में नजर आये। सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों तक जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कराने से लेकर लोगों को टीकाकरण के लिये राजी करना अब तक चुनौतियों से भरा रहा है। जो इन दिनों बारिश के मौसम में ज्यादा जटिल हो चुका है। बावजूद इसके हमारे कई स्वास्थ्य कर्मी तमाम जटिलताओं को मात देकर अपने मकसद को अंजाम देने की मुहिम में जुटे हैं। फारबिसगंज के अम्हारा पंचायत उपस्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एएनएम माधुरी का नाम भी ऐसे ही कर्मियों की सूची में शामिल है। जो कोरोना संक्रमण से बचाव संबंधी उपायों के प्रति लोगों को जागरूक करने, संक्रमितों तक जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कराने के साथ-साथ लोगों को टीकाकरण के लिये प्रेरित करते हुए पूरे समुदाय को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित बनाये रखने में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं।

चुनौतीपूर्ण था लोगों को टीकाकरण के लिये राजी करना :

फारबिसगंज प्रखंड मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर दूर अम्हारा पंचायत पूर्व से ही कई चुनौतियों से घिरा रहा है। पंचायत की अधिकांश आबादी बाढ़ जनित समस्याओं का सामना करने के लिये मजबूर है। आम लोगों के बीच शिक्षा का अभाव महामारी के प्रति लोगों की जागरूकता के मार्ग में शुरू से ही बड़ी बाधा रही है। पंचायत की अधिकांश आबादी के लिये आज भी मजदूरी ही आय का जरिया है। जो उन्हें स्वास्थ्य संबंधी मामलों को लेकर गंभीर होने से रोकता है। माधुरी बताती हैं कि टीकाकरण को लेकर संचालित अभियान के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि गांव के कुछ लोग कोरोना को बीमारी मानने को तैयार नहीं थे। कुछ लोग टीका लेने के बाद किसी दुर्घटना को लेकर आशंकित थे। वहीं ग्रामीणों का एक तबका शिक्षित होने के बाजवूद विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फैलायी जा रही भ्रामक जानकारियों से प्रभावित था। इन चुनौतियों से निपटने के लिये माधुरी ने अपनी अलग कार्य योजना तैयार की जो बाद में बेहद सफल साबित हुई।

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बहन व बेटी बन कर लोगों को समझाया टीकाकरण का महत्व :

माधुरी बताती हैं कि ग्रामीणों को टीकाकरण के लिये राजी करने के लिये उनका विश्वास हासिल करना जरूरी था। इसके लिये उन्होंने घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करते हुए उन्हें बहन व बेटी बनकर टीकाकरण के महत्व को समझाया। धीरे-धीरे उन्हें लोगों का स्नेह व विश्वास हासिल होने लगा। जिसके आगे भ्रम व भ्रांतियों की दिवार दरकने लगी। टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिये ग्रामीण स्तर पर बैठक व चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें प्रखंड व अनुमंडल स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर टीकाकरण को लेकर लोगों के मन में व्याप्त संदेह को दूर करने का प्रयास किया। कुछ दिन बाद ही इसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगे। पहले जो लोग टीकाकरण के विरोध में अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। अब वही लोग जागरूकता संबंधी अभियान से जुड़ कर लोगों को टीकाकरण के लिये प्रेरित करने की मुहिम में जुटे हैं।

दुर्गम इलाके में टीकाकरण को बढ़ावा देने का प्रयास सराहनीय :

पीएचसी फारबिसगंज के स्वास्थ्य प्रबंधक सईदुर्रजमा ने सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाके में टीकाकरण को बढ़ावा देने के माधुरी के प्रयासों का सराहा। उन्होंने कहा कि पंचायत का अधिकांश इलाका बाढ़ प्रभावित है। बावजूद इसके माधुरी दुर्गम रास्तों से गुजर कर लोगों के लिये टीकाकरण की राह को आसान बनाने की अपनी मुहिम में जुटी हुई हैं। वहीं पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव बसाक ने कहा कि माधुरी का प्रयास अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लिये एक मिसाल है। पंचायत में टीकाकरण को बढ़ावा देने में उनका प्रयास बेहद सराहनीय रहा है।

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