पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से स्तन कैंसर जागरूकता माह के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “हर कहानी अनोखी है, हर सफर मायने रखता है” के माध्यम से स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर पहचान और इलाज के महत्व को समझाने तथा मरीजों और कैंसर से उबर चुके लोगों को सहयोग देने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रमों की शुरुआत 24 अक्टूबर को रंगोली प्रतियोगिता से हुई। 27 अक्टूबर को स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने और समय पर जांच व इलाज के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पिंक वॉक का आयोजन किया गया। इसमें एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, डीन (एकेडमिक्स) डॉ. पूनम प्रसाद भदानी, डीन (रिसर्च) डॉ. संजय पांडेय, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रशांत कुमार सिंह, डॉ. प्रितांजलि सिंह, डॉ. मीनाक्षी मिश्रा, डॉ. हरिकेश बहादुर, डॉ. निलेश मणि, डॉ. साधना शर्मा, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. वीणा सिंह, डॉ. अजहर, डॉ. पंकज, डॉ. मुक्ता, सुश्री रीना श्रीवास्तव, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सदस्य और बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थी शामिल हुए। पिंक वॉक के दौरान गुब्बारे छोड़कर और जागरूकता संबंधी नारों के माध्यम से लोगों को स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया गया। बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए भी लोगों को जागरूक किया। कार्यक्रम में बताया गया कि स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा या निप्पल में परिवर्तन, असामान्य स्राव या लगातार सूजन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे किसी भी बदलाव की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। एम्स पटना में स्तन कैंसर की जांच और इलाज की उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के तहत दोपहर में ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर्स मीट का आयोजन किया गया जिसमें कैंसर से उबर चुके लोगों, मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। इस दौरान इलाज के बाद सामान्य जीवन में वापसी, सर्जरी, स्तन पुनर्निर्माण, मैमोग्राफी और एमआरआई से जांच, महिलाओं का स्वास्थ्य तथा इलाज के बाद होने वाली थकान और हाथ में सूजन (लिम्फेडेमा) के प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इन विषयों पर डॉ. प्रितांजलि सिंह, डॉ. अजहर, डॉ. सिरसिज, डॉ. उपासना सिन्हा, सुश्री अनीता पासवान और सुश्री रीना श्रीवास्तव ने अपने विचार साझा किए। कैंसर से उबर चुके लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए। उनकी कहानियों ने बताया कि समय पर इलाज, परिवार का सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति मुश्किल दौर से उबरने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से एम्स पटना के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग ने स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर पहचान और इलाज को प्रोत्साहित करने तथा मरीजों और उनके परिवारों को हर संभव सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था जागरूकता जीवन बचा सकती है, समय पर पहचान इलाज की सफलता की संभावना बढ़ाती है और कैंसर की लड़ाई में किसी को भी अकेला नहीं होना चाहिए।
