पटना, अजीत। अरवल से पटना जाने के दौरान विक्रम तिमोहानी मोर के पास एक खड़ी टैंकलोड़ी में पीछे से ठोकर मार दी जिसमें कर में सवार सात लोग गंभीर रूप जख्मी हो गए. घटना की सूचना पर स्थानीय पुलिस ने कार में सवार लोगों को स्थानीय अस्पताल लाया गया जहां आलोक कुमार 20 वर्षीय की मौत हो गई.वहीं कार में सवार काजल कुमारी 20 वर्ष, दीक्षा कुमारी 25 वर्ष, आराध्या कुमारी 20 वर्ष, दिव्यांशु राज 20 वर्ष, अर्पित पचंदेल 23 वर्ष एवं कार के चालक स्वर्णराज 25 वर्ष गंभीर रूप से जख्मी हो गए जख्मी का इलाज चिकित्सा प्रभारी राजेश कुमार एवं डॉक्टर राजीव रंजन ने इलाज की, वहीं गंभीर रूप से जख्मी को पीएमसीएच रेफर पर किया. घटना की खबर पहुंच कर अरवल निवासी कृष्णा कुमार ने बताया कि मृतक आलोक मेरा पुत्र है सभी उसके भाई बहन एवम् दोस्त के साथ पटना जा रहा था।
पटना के बिक्रम ट्रॉमा सेंटर को चालू करने को लेकर कई सालों से आंदोलन हो रहा है लेकिन आजतक नहीं चालु हो पाया….घटना आदमी देखकर नहीं होता है किसी के साथ भी हो सकता है आज जिस तरह से सात लोग एक साथ दुर्घटनाग्रस्त हुए और भेड़ बकरी की तरह विक्रम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाकर मरने के लिए फेंक दिए गए. एक परिवार के लोग एक कर में सवार होकर पटना की ओर लौट रहे थे तभी विक्रम मोड़ के पास खड़ी टैंक लॉरी से कर टकरा गए जिसमें परिवार के एक लड़के की मौत हो गई और कई लोग बुरी तरह जख्मी हुए.बिक्रम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ना तो एक साथ चार पांच दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों के इलाज करने की सुविधा है और ना ही बेड है.कुछ लोगों को नीचे फर्श पर लिटा दिया गया कुछ लोगों को बेंच पर बैठा दिया गया.अगर ट्रॉमा सेंटर चालू रहता तो कई लोगों के जान बचाई जा सकती थी जिस तरह आज एक मां बाप ने अपना एकलौता बेटा खो दिया.इस तरह हजारों लोगों की इलाज के अभाव में मौत हो चुकी है और आगे भी होती रहेगी।
यहां हजारों लोग बिना इलाज के मर रहे हैं इसका जिम्मेदार कौन। जरा सोंचिये बिक्रम और उसके आसपास कोई भी घटना होने पर घटनास्थल से विक्रम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाने मे 30 से 40 मिनट का समय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण रेफर करने में 45 मिनट से 1घंटा समय उसके बाद पटना जाने में 1 घंटा से डेढ घंटे का समय सोचिए इस 3 घंटे दुर्घटनाग्रस्त मरीज की क्या हालत होगी।
