अररिया, रंजीत ठाकुर | जिले में फाइलेरिया यानी हाथी पांव के मामलों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग विभिन्न स्तरों पर जरूरी पहल कर रहा है। फाइलेरिया मरीजों को जरूरी चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सहजता पूर्वक उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है। खास बात ये कि अब हाथीपांव यानी फाइलेरिया से ग्रसित जटिल मरीजों को भी दिव्यांगता प्रमाणपत्र का लाभ मुहैया कराया जा रहा है। ताकि सहजता पूर्वक उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके।
इसी क्रम में जिले के फारबिसगंज प्रखंड अंतर्गत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हरिपुर में शुक्रवार को विशेष शिविर आयोजित किया गया। शिविर में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह व पंचायत के मुखिया परमानंद ऋषिदेव द्वारा लाभुकों के बीच विकलांगता प्रमाणपत्र वितरित किया गया। इस क्रम में फाइलेरिया के पांच मरीजों को विकलांगता प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। मौके पर पीरामल फाउंडेशन के पीओसीडी दीपक कुमार दास, पीएलसीडी प्रफुल्ल झा सहित केंद्र की सीएचओ सीताराम बेरूवा, एएनएम बेबी कुमारी, नीलम कुमारी सहित गांव के अन्य गणमान्य मौजूद थे।
जटिल मरीजों को मिलेगा दिव्यांगता प्रमाणपत्र का लाभ
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि अब तक सरकार द्वारा दृष्टिहीनता, श्रवणहीनता व शारीरिक रूप से दिव्यांग बाध, मानसिक मंदता व अपंगों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र निर्गत किया जाता था। इसमें अब फाइलेरिया के जटिल मरीजों को भी शामिल किया गया है। जो फाइलेरिया यानी हाथीपांव की वजह से अपंगता का दंश झेल रहे लोगों के लिये बड़ी राहत की खबर है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया के फोर्थ स्टेज व इससे ऊपर के मरीजों का ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र निर्गत किया जायेगा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर राज्य आयुक्त नि:शक्तता द्वारा हाथी पांव के जटिल मरीजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र निर्गत किये जाने का निर्देश प्राप्त है। समुचित जांच के उपरांत दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किये जाने की जानकारी उन्होंने दी।
फाइलेरिया उन्मूलन के प्रति विभाग सतर्क
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम जिले में बेहद सफल साबित हुआ है। अररिया प्री-टास फेज में पहुंचने वाला राज्य के गिनेचुने जिलों की सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया एक मच्छर जनित रोग है। इसका कोई समचुति इलाज नहीं। लेकिन कुशल प्रबंधन व प्रभावित अंगों की समुचित देखरेख से इससे होने वाली जटिलताओं को बहुत हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। वर्ष 2027 तक देश को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर जरूरी पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि जागरूकता व सामूहिक प्रयास से ही जिले को फाइलेरिया से पूरी तरह मुक्त बनाया जा सकता है।
