बिहार

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बरारी में फाइलेरिया मरीजों के विशेष उपचार को फाइलेरिया क्लीनिक शुरू

कटिहार, न्यूज क्राइम 24। 04 दिसंबर। फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों का आसानी से इलाज हो सके इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बरारी में फाइलेरिया क्लीनिक की शुरुआत की गयी है। इसका उद्घाटन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मुसर्रफ हुसैन की अध्यक्षता में फाइलेरिया से ग्रसित नेटवर्क मेंबर द्वारा किया गया। इस दौरान चिकित्सा अधिकारी डॉ खुशबू कुमारी, सहायक प्रशाखा अधिकारी के के जायसवाल, भीबीडीएस सुबोध कुमार, पिरामल एसडीसी ओमकार ठाकुर, सीफार डीसी पल्लवी कुमारी, बीसी अमित कुमार, सीएचओ कौशल राम मीणा, सौरभ कारक आदि उपस्थित रहे।

फाइलेरिया क्लीनिक के उद्घाटन के पश्चात उपस्थित मरीजों की जांच करते हुए उन्हें आवश्यक दवाई के साथ एमएमडीपी किट्स प्रदान की गयी। मरीजों को जानकारी दी गयी कि अब प्रखंड के सभी फाइलेरिया मरीज नियमित रूप से फाइलेरिया क्लीनिक पहुँचकर स्वास्थ जांच करवाते हुए आवश्यक दवाई सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए अब उन्हें ओपीडी की लाइन में लगकर समय व्यस्त करने की आवश्यकता नहीं है। जानकारी हो कि कटिहार जिले में बरारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फाइलेरिया मरीजों के लिए अलग से फाइलेरिया क्लीनिक संचालित करने वाला छठा प्रखंड बन गया है।

फाइलेरिया मरीजों को आसानी से मिलेगी दवाएं और सुविधा :

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मुसर्रफ हुसैन ने बताया कि फाइलेरिया मरीजों को ग्रसित अंगों को नियंत्रित रखने के लिए नियमित रूप से चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसे में उन्हें स्वास्थ्य केंद्र पहुँचकर इलाज कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप बनाया गया है जिसके द्वारा फाइलेरिया मरीजों की मासिक बैठक करते हुए उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली जाती है। ऐसे में जिस फाइलेरिया मरीज को आवश्यक इलाज की जरूरत होती उन्हें अस्पताल से लिंकअप कराया जाता है।उन्हें सभी स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जाती है। मरीजों को अस्पताल पहुँचकर आसानी से मेडिकल सुविधा उपलब्ध हो सके इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फाइलेरिया क्लीनिक की शुरुआत की गई है। पीएचसी में हर सप्ताह मंगलवार को फाइलेरिया क्लीनिक में मरीजों को सुविधा देने के लिए अलग से चिकित्सक उपलब्ध रहेंगे जिससे कि मरीजों को आसानी से आवश्यक जांच एवं दवा उपलब्ध हो सकेगी।

फाइलेरिया क्लीनिक उद्घाटन के साथ मरीजों को दी गयी एमएमडीपी किट्स :

फाइलेरिया क्लीनिक के उद्घाटन के बाद उपलब्ध 35 फाइलेरिया मरीजों को फाइलेरिया ग्रसित अंगों को सुरक्षित रखने के लिए एमएमडीपी किट्स प्रदान की गयी। भीबीडीएस सुबोध कुमार ने बताया कि फाइलेरिया ग्रसित होने पर उसे ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन फाइलेरिया ग्रसित अंगों की नियमित साफ सफाई करने और आवश्यक दवाइयों का उपयोग करने से उसे नियंत्रण में रखा जा सकता। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को हर साल एमएमडीपी किट्स प्रदान की जाती है।

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एमएमडीपी किट्स में मरीजों को टब, मग, साबुन, तौलिया, रुई व मलहम दिया जाता है। जिसके उपयोग करने से फाइलेरिया को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसके लिए मरीजों को नियमित फाइलेरिया ग्रसित अंगों की एमएमडीपी किट्स के उपयोग से साफ सफाई करते हुए ग्रसित अंगों में मलहम लगाने की जरूरत होती है। फाइलेरिया अंगों में हो रहे सूजन को कम करने के लिए घर में एक्सरसाइज करने की जरूरत है। मरीजों द्वारा नियमित रूप से किट्स का उपयोग करने और एक्सरसाइज करने से मरीज एक्यूट अटैक आने से बच सकते  और अपना जीवन सामान्य लोगों की भांति जी सकते हैं।

फाइलेरिया ग्रसित अंगों को सुरक्षित रखने के लिए फाइलेरिया मरीजों को दिया गया प्रशिक्षण :

क्लीनिक में उपस्थित मरीजों को ग्रसित अंगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया। चिकित्सा अधिकारी खुशबू कुमारी ने मरीजों को बताया कि ग्रसित अंगों को सामान्य पानी का उपयोग कर पहले साफ करना चाहिए। उसके बाद साबुन का झाग उत्पन्न करने के बाद सामान्य हाथों द्वारा संबंधित झाग फाइलेरिया ग्रसित हाथ या पैर में लगाना चाहिए। फिर पानी से धोने करने के बाद उसे तौलिए से अच्छी तरह साफ कर वहां मलहम लगाना चाहिए। ऐसा नियमित रूप से करने पर फाइलेरिया ग्रसित अंगों में होने वाली सूजन को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही उपस्थित लोगों को फाइलेरिया होने के कारण, शुरुआती लक्षण और उसके संचरण की जानकारी दी गई।

नेटवर्क मेंबर द्वारा फाइलेरिया के लिए लोगों को किया जा रहा जागरूक :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. जे. पी. सिंह ने बताया कि फाइलेरिया को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप चलाया जा रहा है। इसमें फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को नेटवर्क मेंबर बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेटवर्क मेंबर्स के साथ मासिक बैठक करते हुए उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली जाती है। जरूरत होने पर मरीजों को अस्पताल लाकर आवश्यक दवाई उपलब्ध कराई जाती है। मासिक बैठक में मरीजों द्वारा नियमित साफ सफाई और एक्सरसाइज करने की जानकारी लेते हुए आसपास के लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की जानकारी दी जाती है।

उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नाइट ब्लड सर्वे चलाया जाता है। जिसके तहत रात में सामान्य लोगों का ब्लड सैम्पल लिया जाता है जिससे कि शुरुआत में ही फाइलेरिया होने वाले मरीजों की पहचान की जा सके। लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखा जा सके इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर साल सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम भी चलाया जाता है। जिसके द्वारा 02 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को घर-घर जाकर दवा खिलाई जाती है। लगातार पांच साल तक साल में एक बार दवा सेवन करने से लोग फाइलेरिया बीमारी से सुरक्षित रह सकते हैं।

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