वर्दी के लिए ईंट भट्टे में किया काम!

झारखंड(न्यूज़ क्राइम24): एक ऐसे गांव में पला-बढ़ा लड़का जहां 70 सालों से बिजली नहीं पहुंची थी। जिसके पिता एक कोयला खदान में मजदूरी किया करते थे। पढ़ने लिखने को कभी अच्छा स्कूल नहीं मिला वो लड़का आज डीएसपी है। नाम है किशोर कुमार रजक जो झारखंड में बोकारो के रहने वाले हैं। किशोर कुमार एक गरीब दलित परिवार में जन्मे और गांव के आम बच्चों की तरह ही उनका पालन पोषण हुआ। जिस गांव से वे ताल्लुक रखते हैं, उस गांव में आज तक कोई भी सरकारी पद पर नहीं रहा। उसी गांव का ये लड़का कैसे बना डीसीपी आइये जानते हैं इनकी प्रेरणादायी कहानी के बारे मेें।

गरीब परिवार में जन्मे किशोर ने बचपन से ही बड़ा संघर्ष झेला। परिवार की अपनी ज्यादा कुछ जमीन थी नहीं न ही परिवार के पास इतना पैसा था कि दिल्ली या मुंबई जाकर रोजगार तलाशें। तो उनके पिता ने मजदूरी करते हुए धनबाद में एक कोयला खदान मेें मजदूरी करने की नौकरी पाई। नौकरी क्या थी गुजारे लायक कमाई हो रही थी बस। पढ़ाई लिखाई के लिए किशोर को गांव के ही सरकारी स्कूल में भेजा गया जहां न बच्चे आते थे न ही मास्टर। किशोर को परिवार से लगातार पढ़ाई और सरकारी नौकरी के विषय में प्रेरणा मिलती रहती। पिता कहते बेटा कलेक्टर बनेगा। घर की हालत और परिवार की उम्मीदों को देखते हुए किशोर खुद से ही पढ़ने लगे।

किशोर अपनी पढ़ाई करते और खेती-बा़ड़ी का काम भी संभालते।शाम को गाय बकरी भी चराते। लेकिन गांव के बच्चों के साथ मिलकर पढ़ाई कम मस्ती ज्यादा करते। आज जब वो सरकारी अफसर हैं तो अपनी प्रेरणा के विषय में बात करते हुए बताते हैं कि एक बार जब वो स्कूल में थे तब पढ़ाई छोड़ रोज घूमने निकल जाते थे और छुट्टी के टाइम पर वापस स्कूल में आ जाते। एक दिन मास्टर जी ने उनकी इस हरकत के लिए पिटाई कर दी और बच्चों को समझाते हुए कहा कि तुम में से अगर किसी का भी पढ़ाई लिखाई कर जीवन सफल हो जाए तो मेरे लिए बड़ी बात होगी, मुझे बहुत खुशी होगी। इस बात को किशोर ने अपने दिल से लगा लिया और फिर से पढ़ाई शुरू कर दी।

किशोर ने 10वीं 12वीं पास कर इग्नू से इतिहास विषय में स्नातक किया। वो ग्रेजुएशन के दौरान थर्ड यर में फेल हो गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएएसी की तैयारी का मन बनाया। रिश्तेदारों से पैसे मांग कर किराए के पैसे जुटाए और दिल्ली आकर तैयारी शुरू कर दी। यहां वो जिस मकान में किराय पर रहकर तैयारी कर रहे थे उसी मकान के मालिक के बच्चों को उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। जिसके बाद और भी बच्च आने लगे इससे उनको औसत से ज्यादा कमाई होने लगी। उन्होंने 2011 में यूपीएससी की परीक्षा लिखी और पहले ही प्रयास में असिस्टेंट कमांडेंट का पद मिल गया। इसके बाद उनका डीएसपी के लिए चयन हुआ।