फुलवारीशरीफ, अजीत। हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य तेजी से घटती गौरैया की आबादी के प्रति लोगों को जागरूक करना है. शहरीकरण, प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के कारण कभी हर आंगन की पहचान रही गौरैया अब धीरे-धीरे विलुप्त होती नजर आ रही है.आज भी गांव ज्वार में इसका नाम खुदबुदी चिड़ियां और कई नामों से लोग पुकारते हैं।
लेकिन फुलवारी शरीफ में आज भी कुछ ऐसे घर हैं, जहां गौरैया सिर्फ एक पक्षी नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा है. फुलवारी शरीफ के सैयद अहमद शरीफ उर्फ बाबू भाई का घर किसी पुरानी हवेली से कम नहीं है. पुरखों के जमाने का बना यह मकान आज भी गौरैयों की चहचहाहट से गुलजार रहता है. बाबू भाई बताते हैं कि “हमारे घर में गौरैया सिर्फ आंगन तक सीमित नहीं है, बल्कि बेडरूम से लेकर किचन तक उसका आना-जाना लगा रहता है. दिन-रात उसकी चहचहाहट से घर जीवंत रहता है. अगर एक दिन भी गौरैया नहीं दिखे, तो घर सूना-सूना लगता है। वे आगे कहते हैं कि “हमारे पुरखों के समय से ही गौरैयों को दाना-पानी देने की परंपरा चली आ रही है. आज भी हम उसी परंपरा को निभा रहे हैं. हमारे लिए गौरैया जीवन शैली का हिस्सा है.”
वहीं रानीपुर निवासी राम अयोध्या सिंह यादव का घर भी गौरैयों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है. वे बताते हैं कि “गौरैया को हम अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं. जब हम खाने बैठते हैं, तो गौरैया भी थाली तक पहुंच जाती है. जब तक हम अपने हाथ से उसे दाना नहीं दे देते, तब तक वह खाने को छूती भी नहीं है। राम अयोध्या सिंह भावुक होकर कहते हैं कि “आज भी हम लोग बिना गौरैया को दाना दिए खुद खाना नहीं खाते. यह बचपन से चली आ रही आदत है. अब तो यह हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है।
विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर इन परिवारों ने युवाओं से अपील की है कि वे इस नन्हे पक्षी के संरक्षण के लिए आगे आएं. घरों में दाना-पानी रखें, कृत्रिम घोंसले बनाएं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका निभाएं. सार्थक सिंह भी फुलवारी शरीफ में परिवार के साथ रहते हैं.इनका कहना है कि गौरैया हमारे दादी के घर राजगीर से लेकर ननिहाल दानापुर और फुलवारी शरीफ के मकान तक हमारी जीवन शैली में रचा बसा हुआ है .
गौरैया पक्षी नहीं परिवार के सदस्यों की तरफ घर आंगन में फुदकती फिरती है उसके दाना पानी की व्यवस्था करते है और सभी लोगों से अपील करते हैं कि इस नन्ही चिड़िया के
जीवन को संकट से उबारिए .इसके संरक्षण के लिए सभी लोगों को आगे आना चाहिए . आज हम इस नन्ही चिड़िया की देखरेख करेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इसे देख पाएंगे गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे आंगन की रौनक और पारिस्थितिक संतुलन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है. अगर इसे बचाने के लिए अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां इसे सिर्फ किताबों में ही देख पाएंगी।
