फुलवारीशरीफ, अजित। मनरेगा मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर 20 मई को बिहार में राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है. यह फैसला संयुक्त संघर्ष समिति, बिहार के बैनर तले आयोजित बैठक में लिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक में सरकार से 700 रुपये दैनिक मजदूरी और साल में 200 दिन काम सुनिश्चित करने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। बैठक जनशक्ति भवन में वरिष्ठ कामरेड जानकी पासवान की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, राज्य सचिव सह पूर्व विधायक गोपाल रविदास, राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी, बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन के राज्य महासचिव भोला प्रसाद दिवाकर, राज्य अध्यक्ष देवेंद्र चौरसिया, भारतीय खेत मजदूर यूनियन के नेता अकेला जी और राम पुकार सहनी समेत कई नेता मौजूद रहे. नरेगा संघर्ष मोर्चा के आशीष और संतोष ठाकुर तथा मनरेगा मजदूर सभा के राज्य नेता जीतेंद्र चंद्रवंशी ने भी बैठक में भाग लिया। संयुक्त बैठक में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मनरेगा की पुनर्बहाली और ग्रामजी कानून को वापस लेने की मांग की गई. नेताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और रोजगार के अवसर समाप्त होते जा रहे हैं. मनरेगा जैसे संवैधानिक अधिकार को कमजोर करने से गरीबों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
हड़ताल को सफल बनाने के लिए राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर व्यापक तैयारी करने का निर्णय लिया गया है. 30 अप्रैल तक सभी जिलों में संयुक्त बैठक आयोजित करने और 10 मई तक प्रखंड स्तर पर बैठकें पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही 1 मई से 7 मई तक गांव-गांव में मई दिवस मनाते हुए हड़ताल के समर्थन में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा.
आयोजकों ने बताया कि 15 मई को पटना में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. 20 मई को पंचायत स्तर पर हड़ताल के दौरान जुलूस निकालकर पंचायत भवनों पर सभा की जाएगी और मजदूरों के हस्ताक्षरयुक्त स्मारपत्र राष्ट्रपति को भेजा जाएगा. हड़ताल के प्रचार-प्रसार के लिए 50 हजार पर्चे छापने और सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान तेज करने का भी निर्णय लिया गया है।
