अगर कोई पुलिस अधिकारी या थानेदार आपकी बात न सुनें तो सीनियर पुलिस अधिकारी जैसे एसएसपी ऑफिस या फिर सीधे 100 या 112 नंबर पर कॉल कर इस बारे में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
कोशिश करें कि जब 100 या 112 नंबर पर बात हो तो उसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर लें इसके बाद भी बात नहीं सुनी जाए तो आप सीधे राज्य की पुलिस या पुलिस मुखिया को ट्वीट कर दें।
अगर आप ट्वीट नहीं कर सकते हैं तो एसएसपी या एसपी का नंबर लेकर सीधे उन्हें बताएं इसके बाद भी मदद नहीं मिले तो क्राइम हेल्पलाइन के नंबर पर कॉल करें या वॉट्सऐप करें
पुलिस के अत्याचार की शिकायत करने की प्रक्रिया-
पुलिस की क्रूरता, अत्याचार, कानून और शक्तियों का दुरूपयोग करने और आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पूरे देश के हर राज्य, सभी केंद्रशासित प्रदेश और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण बनाये गये है जिसके अंतर्गत आम नागरिक पुलिस क्रूरता, अत्याचार
जैसे-
अवैध रूप से हिरासत में रखना
हिरासत में रहते हुए गंभीर चोट लगना या मृत्यु होना
पुलिस हिरासत में बलात्कार या उसकी कोशिश करना
अवैध शोषण या घर-जमीन हड़पने जैसे अपराध
ऐसी कोई घटना जिसमें पद या शक्तियों का दुरूपयोग किया गया हो
ऐसी किसी भी तरह की क्रूरता या अत्याचार होने पर इसकी शिकायत अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस शिकायत प्राधिकरण में कर सकते हैं अगर वहां भी राहत ना मिले तो कोर्ट के ज़रिये दोषी को सजा दिलाई जा सकती है।
शिकायत कैसे करें-
शिकायत करने के लिए एक सादे कागज़ पर लिखा हुआ या टाइप किया हुआ लेटर केस या घटना से सम्बंधित सभी सबूतों के साथ एक हलफनामा लगाकर, अपने नाम से अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस शिकायत प्राधिकरण को भेज सकते हैं गुमनाम या किसी अन्य नाम से ना भेजें अपने साथ घटित घटना का पूरा ब्यौरा, नाम, पता और फोन नंबर सहित लिखें।
सुप्रीम कोर्ट की ये पहल आम नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा और पुलिस अत्याचार से बचाव करने के लिए की गयी है लेकिन इसकी सार्थकता तभी संभव है जब हम अपने साथ हुए दुर्व्यवहार से डरने की बजाये जागरूक होकर आगे आएं ताकि निर्दोषों के साथ होने वाली इस क्रूरता का अंत हो।
