भोजपुर, (न्यूज़ क्राइम 24) आरा डीएम परिसर उद्यान एवं सभागार में अगस्त क्रांति 1942 के अग्रदूत कवि कैलाशपति सिंह के 84वीं शहादत दिवस के अवसर उनके तैल्यचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए समाजसेवी सह संत रविदास जनसेवा संगठन भोजपुर आरा के संस्थापक महासचिव अमरदीप कुमार जय ने कहां की कवि कैलाश ने अपनी भारत माता की जकड़ी बेड़ियों को काटकर देश को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान दी हंसते हंसते अंग्रेज गोरे बलूचो से जिनको आज कोई विशेष जाती के बंधन से जोड़कर कार्यक्रम आयोजित कर रहा हैं शासन प्रशासन के बीच में अपना जमीर को गिरवी रखकर हो की सही बात नहीं हैं l
कवि कैलाशपति की शहादत दिवस मनाने की शुरुआत 1992 वर्ष में नवादा आरा निवासी स्वर्गीय केशरी ने की थी जिनका कोई नाम नहीं ले रहा हैं न ही कोई नाम जानना चाहता है कोई जिसमें आयोजन कमेटी समिति के लोग भी शामिल हैं जबकि शहादत दिवस के बैनर फ्लैक्स पर अपना खुद का फोटो कैलाशपति से बड़ा रखकर राजनीति कर रहे हैं न कि कवि कैलाशपति से कोई प्रेरणा लेकर अपने जीवन में कोई सार्थक पहल कर रहे हैं ऐसा भी नहीं हैं।आगे श्री जय ने कहां की कवि कैलाश का आदमकद प्रतिमा उनके पैतृक निवास स्थान घोड़ादेयी बड़हरा हैं जहां पर इनके बचे कूचे परिजनों के बीच में ही पुष्पांजलि सुमन पुष्प अर्पित कर शहादत दिवस मनाया जाता हैं आरा कलेक्ट्री परिसर में जहां पर कवि कैलाश ने अपनी जान दी वहां पर आजादी के बाद के प्रशासन से जुड़े अधिकारी उतना मान सम्मान नहीं दिए केवल एक अधिकारी संजय सिंह को छोड़कर सभी अधिकारी ने अपना कोरम पूरा किया पुष्पांजलि अर्पित करने का और अपने से अधीन वरीय अधिकारियों के प्रोटोकॉल में सिर्फ मौजूदगी दिखाने मात्र जो कि गलत बात हैं
आगे से इस गलत परम्परा को दूर करने की जरूरत हैं और आयोजन समिति से आग्रह हैं कि आप अपने आचरण और व्यवहार में सुधार लाएं खुद को और अमर शाहिद कवि कैलाश को किन्हीं के आगे गिरवी न रखे न ही उनके शहादत को ऐसे ही जाया करे ये सिर्फ आपके नहीं हैं, ये पूरे जनपद के साथ पूरे देश के धरोहर हैं जिनको हमें संजोने की जरूरत हैं और अगस्त क्रांति के दौरान शहीद हुए सभी गुमनाम शहीदों के जीवनी को संयोजकर लिखने की जरूरत हैं ताकि आने वाली हमारी पीढ़ी उसको पढ़कर समझकर उसपर अमल कर कुछ प्रेरणा लेकर देश की मजबूत बुनियाद की नींव रख सके यही सच्ची श्रद्धांजलि होंगी हमारी हम सबकी कवि कैलाश पति के प्रति जय हिंद भारत माता की जय।इस अवसर पर समाजसेवी अमरदीप कुमार जय के साथ स्वामी विक्रमादित्य पाल, दिनकर सम्मान प्राप्त कवि रमेश सिंह “रामप्रपन्न” देह दानधारी सामाजिक कार्यकर्ता रामबाबू प्रसाद चौरसिया, सुरेश प्रसाद भोजपुरी आदि कई गणमान्य लोगों ने उत्साह पूर्वक पूरे जोश के साथ कवि कैलाश पति को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दिए l
