पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) बुधवार को जिले के इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, पूर्णिया परिसर में जिला प्रशासन के तत्वावधान में उच्च जोखिम गर्भवती (High Risk Pregnancy – HRP) महिलाओं के लिए विशेष पोषण सहायता वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी, पूर्णिया अंशुल कुमार (आई०ए०एस०) द्वारा किया गया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) सोरेंद्र कुमार दास, शिव शेखर आनंद, यूनिसेफ सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी, आशा एवं एएनएम कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी महिलाएं उपस्थित रहीं।
“उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान और समुचित प्रबंधन मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है : जिलाधिकारी
जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि “उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान और समुचित प्रबंधन मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित जांच, संस्थागत प्रसव तथा पर्याप्त पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है और सभी संबंधित पदाधिकारियों को इस दिशा में संवेदनशील एवं सक्रिय रहना होगा।”
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को पोषण सहयोग प्रदान कर उनके एवं गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाना है :
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली 90 गर्भवती महिलाओं को पोषण सहयोग प्रदान कर उनके एवं गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाना है। इस दौरान लाभार्थियों के बीच पोषण किट (फूड पैकेट) का वितरण किया गया, जिसमें आवश्यक पोषक तत्वों से युक्त सामग्री शामिल थी। साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC), आयरन-फोलिक एसिड एवं कैल्शियम का सेवन, टीकाकरण तथा संस्थागत प्रसव (स्वास्थ्य संस्थान में सुरक्षित प्रसव) के महत्व के बारे में विशेष रूप से जागरूक किया गया।
जिला पदाधिकारी ने विशेष रूप से यह भी बताया कि गर्भवती महिलाओं की समुचित जांच एवं परामर्श के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9, 15 एवं 21 तारीख को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क जांच एवं परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की गई कि वे इन तिथियों पर अवश्य अपनी जांच कराएं तथा प्रसव के लिए पहले से ही नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान का चयन सुनिश्चित करें।
उच्च जोखिम गर्भावस्था की प्रमुख श्रेणियां (HRP Categories) :
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि निम्नलिखित स्थितियों में गर्भवती महिला को उच्च जोखिम श्रेणी में रखा जाता है—
(1) सामान्य जोखिम कारक :
-कम आयु (20 वर्ष से कम) या अधिक आयु (35 वर्ष से अधिक)
-बार-बार गर्भधारण (4 या अधिक)
-कम कद (145 सेमी से कम)
-पिछले प्रसव में जटिलता या सिजेरियन
-कम अंतराल में गर्भधारण
-पूर्व में शिशु में विकृति या खराब प्रसूति इतिहास।
(2) चिकित्सीय समस्याएं :
-गंभीर एनीमिया (Hb 7 gm से कम),
-उच्च रक्तचाप/प्री-एक्लेम्पसिया,
-गर्भकालीन मधुमेह (GDM)
-थायरॉयड
-हृदय या किडनी रोग
-टीबी
-मलेरिया
-एचआईवी (HIV)
-सिफिलिस
-हेपेटाइटिस-B जैसे संक्रमण
(3) वर्तमान गर्भावस्था में जटिलताएं :
गर्भ में शिशु की हलचल कम होना, अत्यधिक सूजन, तेज सिरदर्द या धुंधला दिखना, योनि से खून या पानी का रिसाव, समय से पहले प्रसव पीड़ा, जुड़वा या एक से अधिक गर्भ, असामान्य भ्रूण स्थिति।
जिले में सभी उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी लाइन लिस्टिंग की जा रही है : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि जिले में सभी उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी लाइन लिस्टिंग की जा रही है तथा PMSMA/e-PMSMA दिवसों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) सोरेंद्र कुमार दास, ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर संपर्क कर महिलाओं की नियमित निगरानी की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर एम्बुलेंस (102) सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि समय पर उन्हें स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाया जा सके और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन द्वारा यह संदेश दिया गया कि “उच्च जोखिम गर्भावस्था में विशेष देखभाल, नियमित जांच, संतुलित पोषण एवं संस्थागत प्रसव ही सुरक्षित मातृत्व की कुंजी है।” यह कार्यक्रम मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सराहा गया।
