फुलवारीशरीफ, अजित। एम्स पटना ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए अपने परमाणु चिकित्सा विभाग में अत्याधुनिक स्पेक्ट-सीटी गामा कैमरे की शुरुआत की है. इस नई तकनीक के जुड़ने से बिहार और पूर्वी भारत के मरीजों को अब विश्वस्तरीय, सटीक और तेज जांच सुविधा अपने ही राज्य में उपलब्ध होगी। संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिग.) डॉ. राजू अग्रवाल ने इसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीकी क्रांति की दिशा में अहम कदम बताया. उन्होंने कहा कि जटिल बीमारियों की उन्नत जांच के लिए अब मरीजों को दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़ेगा. इससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ, समान और प्रभावी बनेंगी।
नया स्पेक्ट-सीटी तंत्र शरीर के भीतर हो रही क्रियाओं की क्रियात्मक चित्रांकन और अंगों की संरचना की संगणकित टोमोग्राफी को एक साथ प्रदर्शित करता है. इससे बीमारी का सटीक स्थान और उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आती है. यह तकनीक कैंसर, हृदय रोग, मस्तिष्क संबंधी बीमारियों, हड्डी रोग तथा थायरॉयड और पैराथायरॉयड विकारों की जांच में विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है.
यह अत्याधुनिक प्रणाली न केवल बीमारी को प्रारंभिक चरण में पहचानने में सहायक होगी, बल्कि मरीज की स्थिति के अनुसार सटीक उपचार योजना तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परमाणु चिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि यह पहल विभाग को क्षेत्रीय स्तर पर उत्कृष्ट केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक साबित होगी. इससे मरीजों को बेहतर सेवा मिलने के साथ चिकित्सा विद्यार्थियों, स्नातकोत्तर रेजिडेंट चिकित्सकों और शोध कार्यों को भी नई दिशा मिलेगी।
चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) अनूप कुमार ने कहा कि एम्स पटना आधुनिक तकनीक को सीधे मरीजों की सेवा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है. स्पेक्ट-सीटी की शुरुआत उच्च विशिष्ट जांच सेवाओं को और सशक्त बनाएगी.
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा, प्रो. (डॉ.) त्रिभुवन कुमार, प्रो. (डॉ.) क्रांति भावना, प्रो. (डॉ.) अमित राज, उप निदेशक (प्रशासन) निलोत्पल बल सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक, रेजिडेंट चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। स्पेक्ट-सीटी गामा कैमरे की स्थापना केवल एक मशीन का उद्घाटन नहीं, बल्कि बेहतर, भरोसेमंद और समयबद्ध जांच सेवाओं की दिशा में मजबूत संकल्प का प्रतीक है. एम्स पटना ने एक बार फिर साबित किया है कि अत्याधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदना साथ-साथ चल सकती हैं।
