अररिया, रंजीत ठाकुर। नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत नवाबगंज पंचायत में आजादी के बाद 1955 ईस्वी में करीब 10 पंचायतों के स्वास्थ्य सुविधा के लिए समाजसेवियों के सहयोग से औषधालय का निर्माण किया गया था। बदलते समय के साथ औषधालय का नाम बदलकर अतिरिक्त उप स्वास्थ्य केंद्र फिर अतिरिक्त प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज, रखा गया, जो जर्जर हो गया है। जबकि 69 वर्ष पुराने भवन में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इस भवन के छत से बरसात में पानी टपकता रहता है। छत से कंक्रीट भी मरीजों के ऊपर गिरता रहता है। इन सारी बातों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी सहित जनप्रतिनिधि को बार-बार दिया गया है।
परंतु किसी ने इस तरफ देखने का जहमत नहीं लिया। बता दें कि अस्पताल परिसर में ही करोड़ों की लागत से 10 वर्ष पूर्व नए भवन का आधारशिला रख कर निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था। परंतु अब तक निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है।अस्पताल में पदस्थापित कर्मी बताते हैं निर्माण कार्य प्रारंभ के 1 वर्ष बाद ही संवेदक निर्माण कार्य छोड़ कर फरार हो गया है। अस्पताल प्रभारी के द्वारा स्वास्थ्य पदाधिकारी को कई बार पत्र के माध्यम से भवन के संबंध में अवगत कराया गया है। परंतु पदाधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।
जबकि प्रत्येक दिन सैकड़ों मरीजों का इस अस्पताल में इलाज किया जाता है। वहीं दर्जनों महिलाओं का प्रसव भी किया जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं भवन को लेकर कई बार जिला पदाधिकारी से लेकर जिला स्वास्थ्य पदाधिकारी एवं अररिया सांसद, नरपतगंज विधायक, अनुमंडल पदाधिकारी फारबिसगंज, तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी नरपतगंज,एवं प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी नरपतगंज को भवन के संबंध में जानकारी दिया गया है, परंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया। इससे यह प्रतीत होता है कि भ्रष्टाचार में सभी लोग मिले हुवे हैं। बिहार सरकार में स्वास्थ्य कि व्यवस्था केवल कागजों पर सिमट कर रह गई है,धरातल पर भ्रष्टाचार झलक रहा है।
कैप्शन फ़ोटो- 01- 1955 में बने जर्जर भवन
कैप्शन फ़ोटो-02- अर्ध निर्मित नए भवन भ्रष्टाचार की भेंट
दोनों फ़ोटो लगा देंगे
