पूर्णिया(न्यूज क्राइम 24): लक्ष्य एक ऐसा मिशन कार्यक्रम है जिसके माध्यम से स्वास्थ्य विभाग अपनी कामयाबी की ओर लगातार अग्रसर है। क्योंकि इसी उदेश्यों को शत प्रतिशत लागू करने को लेकर जन-जन तक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का कार्य स्थानीय स्तर पर किया जाता है। जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत दो सदस्यीय टीम ने जिले के रेफ़रल अस्पताल रुपौली, अनुमंडलीय अस्पताल धमदाहा और अंतिम दिन रेफ़रल अस्पताल अमौर का भ्रमण किया है।
इस टीम में पटना के कॉलेज ऑफ नर्सिंग नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की सहायक प्राध्यापक डॉ संध्या सिंह एवं जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से जिला सलाहकार, गुणवत्ता यक़ीन डॉ अनिल कुमार शर्मा शामिल हैं। इस अवसर पर जिला गुणवत्ता, सलाहकार यक़ीन डॉ अनिल कुमार शर्मा, यूनीसेफ के क्षेत्रीय सलाहकार शिव शेखर आनंद एवं राज कुमार, केयर इंडिया की संध्या कुमारी, सिफ़ार के धर्मेंद्र रस्तोगी, रुपौली के बीएचएम रंजीत कुमार, धमदाहा के एमओआईसी डॉ मनोज कुमार, एचएम विकल कुमार, अमौर के एमओआईसी डॉ बरकतुल्लाह, एचएम अनिल कुमार पासवान के अलावा तीनों अस्पताल के प्रसव कक्ष की प्रभारी सहित सभी स्टाफ़ नर्स एवं एएनएम उपस्थित थी।
निरीक्षीय टीम ने तीन स्वास्थ्य संस्थानों का किया निरीक्षण: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के उद्देश्य से लक्ष्य कार्यक्रम के तहत प्रमाणीकरण के लिए रेफ़रल अस्पताल रुपौली, अनुमंडलीय अस्पताल धमदाहा एवं रेफ़रल अस्पताल अमौर का लक्ष्य योजना के तहत राज्य स्तरीय टीम के द्वारा निरीक्षण किया गया। इसकी तैयारी विगत कई महीनों से चल रही थी।
बता दें कि ज़िले के कई स्वास्थ्य केंद्रों को लक्ष्य योजना के तहत प्रमाणीकरण किया जा चुका है। दरअसल इन तीनों स्वास्थ्य संस्थानों को लक्ष्य कार्यक्रम से जोड़ने के लिए राज्य स्तरीय टीम के द्वारा निरीक्षण किया गया है। निरी क्षीय टीम के द्वारा तीनों स्वास्थ्य संस्थानों के एमओआईसी एवं अस्पताल प्रबंधकों को साफ-सफ़ाई, शुद्ध पेयजल, शौचालय, जच्चा एवं बच्चा, कागज़ात, संस्थागत प्रसव को लेकर कई तरह के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
प्रसव से संबंधित सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद ही किया जाता लक्ष्य प्रमाणीकरण: डॉ संध्या
कॉलेज ऑफ नर्सिंग नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पटना की सहायक प्राध्यापक डॉ संध्या सिंह ने बताया कि लक्ष्य योजना के तहत भारत सरकार द्वारा प्रसव कक्ष एवं मैटरनिटी ओटी के लिए प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गयी है। जो मानक स्तर पर प्रसव से संबंधित सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद ही दी जाती है। इसकी व्यवस्था तीन स्तरों पर की गई है।
पहला अस्पताल स्तर पर क्वालिटी सर्किल टीम, दूसरा जिला स्तर पर जिला गुणवत्ता यकीन समिति, प्रमंडलीय स्तर पर रिजनल कोचिंग टीम के स्तर से निरीक्षण के बाद ही निर्धारित मानकों के आधार पर कम से कम 70 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त होने के बाद इसे राज्य स्तर पर मान्यता लेने के लिए भेजा जाता है। इसके साथ ही राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा गठित टीम के द्वारा प्रसव कक्ष और ओटी के निरीक्षण के बाद ऑडिट की जाती है। मुख्यालय की टीम द्वारा विभिन्न मानकों के निरीक्षण में कम से कम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त होने चाहिए तभी राज्यस्तरीय टीम के द्वारा उसे प्रमाण पत्र दिया जाता है।
