सक्षम लोग फ़रीज़ा-ए-हज में देर न करें : मौलाना शिबली क़ासमी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> इमारत शरिया के महासचिव मौलाना मोहम्मद शिबली क़ासमी ने देश भर के इमामों और ख़ुतबा से अपील की है कि आगामी जुमे के ख़ुत्बों में फ़रीज़ा-ए-हज की अहमियत और फ़ज़ीलत को अपना विषय बनाएं&period; उन्होंने कहा कि लोगों को हज की तरग़ीब देना वक्त की ज़रूरत है&comma; क्योंकि यह इस्लाम का एक बुनियादी रुक्न है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने बताया कि हज 1447 हिजरी &lpar;2025-26&rpar; के लिए हज कमेटी ऑफ़ इंडिया द्वारा ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जारी है और आवेदन की आख़िरी तारीख़ 31 जुलाई 2025 है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मौलाना शिबली ने अफ़सोस जताते हुए कहा कि मुल्क में हज़ारों ऐसे लोग हैं जिन पर हज फ़र्ज़ हो चुका है&comma; मगर जागरूकता और रहनुमाई की कमी के कारण वे अब तक इस फ़रीज़े की अदायगी से महरूम हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि अतीत में जब इमामों और ख़ुतबा ने मस्जिदों से जागरूकता फैलाई तो कई लोगों ने हज किया&comma; जो क़ाबिले-सताइश है&period; इमारत शरिया हमेशा से दीनी रहनुमाई करती रही है और यह जागरूकता मुहिम उसी सिलसिले की एक कड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इमाम और ख़ुतबा अगर अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं&comma; तो हज अदा करने वालों की तादाद में बढ़ोतरी होगी और लोग इस अज़ीम इबादत से लाभ उठा सकेंगे।<&sol;p>&NewLine;

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