नवजात शिशु मृत्यु को नियंत्रित करने को स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ  कार्यशाला  आयोजित

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पूर्णिया&comma; न्यूज क्राइम 24।<&sol;mark><&sol;strong> नवजात शिशु मृत्यु को नियंत्रित करने के लिए बुधवार को जिलास्तर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन स्थानीय होटल में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में यूनिसेफ कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पंड्या&comma; अपर समाहर्ता गौरव कुमार&comma; सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी&comma; राज्य स्वास्थ्य समिति के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डॉ विजय प्रकाश राम&comma; यूनिसेफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ सिद्धार्थ शंकर रेड्डी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस दौरान जिले के सभी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी&comma; स्वास्थ्य प्रबंधक&comma; अस्पताल प्रबंधक&comma; प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक एवं प्रसव कक्ष परिचारिका &lpar;इंचार्ज&rpar; उपस्थित रहीं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने को स्वास्थ्य अधिकारियों को दी गई जानकारी- &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवजात शिशु कार्य योजना का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 तक 0 से 28 दिनों तक के बच्चों के मृत्यु दर में कमी लाना है। वर्तमान में एसआरएस डाटा के अनुसार बिहार राज्य का नवजात शिशु मृत्यु दर 21 एवं स्टिल बर्थ रेट 19 है। इसमें पूर्णिया जिला का स्टिल बर्थ रेट 13 है। नवजात शिशु कार्य योजना का मुख्य उद्देश्य इसमें कमी लाते हुए इसे 10 करना है। इस हेतु स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा  भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद&comma; दिल्ली से ईनक्लीन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली&comma; एम्स पटना&comma; मेडिकल कॉलेज पूर्णिया एवं यूनिसेफ के सहयोग से पूर्णिया जिले को भारत में नवजात शिशु मृत्यु दर को सिंगल डिजिट में लाने के लिए शोध करने हेतु चिह्नित किया गया है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में जिलाधिकारी कुंदन कुमार द्वारा बताया गया कि भारत में केवल दो जिले को नवजात शिशु मृत्यु दर के कारणों का पता लगाने और इसे कम करने के लिए शोध करने हेतु चिह्नित किया गया है। इसमें एक छत्तीसगढ़ राज्य का बीजापुर और दूसरा बिहार राज्य का पूर्णिया जिला है। यह हमारे लिए एक अवसर है कि हम साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को सामुदायिक  स्तर पर सुदृढ करने हेतु कार्य करें। ताकि सभी किशोरी&comma; गर्भवती महिला एवं बच्चों को लाभ मिल सके तथा नवजात शिशु मृत्यु दर में आवश्यक कमी लाई जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को चिह्नित कर संस्थागत प्रसव करें सुनिश्चित &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि जिले में स्टिल बर्थ ऑडिट की गतिविधि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व से की जा रही है। हमलोग प्रयास कर रहे हैं कि सभी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर संस्थागत प्रसव सुनिश्चित की जाए। अभी जिले में कुल 504 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया गया है। उन सभी को नियमित प्रसव पूर्व जांच करते हुए उनके संस्थागत प्रसव कराने पर जोर दिया जा रहा है। जिससे कि महिलाऐं और बच्चे बिल्कुल स्वस्थ रह सकें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गर्भावस्था में कमजोर पोषण स्टिल बर्थ का मुख्य कारण &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि नवजात शिशुओं के स्टिल बर्थ का मुख्य कारण गर्भवती महिलाओं की कमजोर पोषण&comma; एनीमिया&comma; गर्भावस्था के दौरान एएनसी जांच कम होना है। इस पर लोगों को ध्यान देने की आवश्यकता है। यूनिसेफ कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पंड्या ने बताया कि कोविड के पूर्व 2016 में स्टिल बर्थ रेट 6 था जबकि कोविड के बाद इसमें अत्यधिक वृद्धि हो गई है। अब ये बढ़कर 19 हो गया है। प्रसव के के समय स्टिल बर्थ सबसे ज्यादा होता है। यह 68&period;5&percnt; हो गया है। इसे कम करने की जरूरत है। जिसके लिए लोगों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों को भी सुचारू रूप से कार्य करने की जरूरत है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यूनिसेफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ सिद्धार्थ शंकर रेड्डी ने बताया कि आईएनएपी&sol;एसडीजी के अनुसार नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करना हमलोगों का मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए हम सभी आईसीएमआर&comma; एम्स&comma; इनक्लीन&comma; राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे। कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में इनक्लीन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली से डॉ मनोज दास&comma; एम्स पटना से डॉ सौरभ कुमार&comma; शिशु रोग विभाग विभागाध्यक्ष डॉ प्रेम प्रकाश&comma; मेडिकल कॉलेज पूर्णिया की प्रसूति रोग विभाग विभागाध्यक्ष डॉ ऋचा तथा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली से डॉ अमलीन शुक्ला द्वारा उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया।<&sol;p>&NewLine;

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