फुलकाहा में श्रीमद् देवी भागवत कथा का हवन-पूर्णाहुति के साथ समापन, विशाल भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर।<&sol;strong> सार्वजनिक दुर्गा माता मंदिर परिसर&comma; फुलकाहा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन एवं पूर्णाहुति के साथ श्रद्धापूर्ण समापन हो गया। समापन अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।<br>कथावाचिका राजयोगिनी बीके प्रभा दीदी ने हवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ का धुआं वातावरण और वायुमंडल को शुद्ध करने के साथ-साथ लोगों के आत्मबल को भी बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् देवी भागवत के श्रवण से जीव में भक्ति&comma; ज्ञान और वैराग्य का भाव उत्पन्न होता है तथा इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में परिवर्तित हो जाते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि सत्संग से ज्ञान की वृद्धि होती है और एक आदर्श समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्ञान और धन दोनों का दान करने से उनमें वृद्धि होती है&comma; लेकिन उनका उपयोग सदैव सत्पात्र के लिए ही होना चाहिए। उन्होंने बताया कि हवन-यज्ञ से 33 कोटि देवी-देवता प्रसन्न होते हैं तथा प्रकृति का संतुलन भी बना रहता है। कथा के अंतिम दिन राजयोगिनी बीके प्रभा दीदी ने रुद्राक्ष&comma; भस्म और तिलक के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने मस्तक पर सदैव विजय तिलक धारण करना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बिना तिलक के धार्मिक कार्य पूर्ण नहीं माने जाते। उन्होंने अपनी इष्ट साधना के अनुसार तिलक लगाने तथा किसी अन्य तिलक की निंदा नहीं करने की सीख दी। साथ ही उन्होंने कहा कि अपवित्र अवस्था में रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए और किसी अन्य व्यक्ति का रुद्राक्ष भी नहीं पहनना चाहिए। यज्ञ से उत्पन्न भस्म को सर्वोत्तम बताते हुए उन्होंने कहा कि भस्म धारण करने वाला व्यक्ति शिवस्वरूप माना जाता है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>27 जून से प्रारंभ हुए इस नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। इस दौरान कथावाचिका ने देवी के विभिन्न स्वरूपों&comma; देवी उपासना की विधियों तथा सामाजिक कुरीतियों पर भी सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। समापन समारोह में मंदिर समिति की ओर से कथावाचिका राजयोगिनी बीके प्रभा दीदी एवं उनके सहयोगियों को सम्मानित किया गया। वहीं व्यासपीठ से मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को भी सम्मान प्रदान किया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष श्यामदेव यादव&comma; उपाध्यक्ष रंजीत ठाकुर&comma; कोषाध्यक्ष महेश प्रसाद गुप्ता&comma; सचिव उमा प्रसाद साहा&comma; राजेश गुप्ता&comma; मनोज यादव&comma; खगेन्द्र यादव&comma; शिव प्रसाद साहा&comma; ललित झा&comma; ललित पोद्दार सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

स्कूल में पिटाई के बाद छात्र की मौत से पटना में बवाल

डायल-112 के सफल चार वर्ष पूरे, बिहार में 60 लाख से अधिक लोगों को मिली आपात सहायता

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नवनिर्वाचित जिला अध्यक्षों की 18 जुलाई को पटना में होगी महत्वपूर्ण बैठक