आस्था की महापर्व छठ पूजा को लेकर सजने लगी बाजार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर &colon;<&sol;strong> नरपतगंज प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में जैसे-जैसे आस्था का महापर्व छठ पूजा के दिन नजदीक आते जा रहें है वैसे-वैसे श्रद्धालुओं में सामग्री जुटाने का उत्सुकता बढ़ता जा रहा है। वहीं बाजार भी सुप&comma;दौरा&comma;कोनिया&comma; फल&comma;केला आदि सामग्रियों से बाजार सजने लगा है। इस दौरान फुलकाहा में खरीदारी करते महिला श्रद्धालु मीना देवी ने कहा इस बार छठ के सामग्री काफी मांगे दामों में खरीदा जा रहा है। वहीं श्रद्धालु संजय पासवान ने कहा सामग्री जितने भी महंगे क्यों ना हो जाए छठी मैया का पर्व हम लोग नहीं छोड़ सकते हैं। रामवृक्ष पासवान ने कहा छठ पूजा को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में खास कर महिलाओं में काफी उत्साह है। छठ पर्व करने से सभी तरह के मन्नत पूरी होती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>छठ पूजा कब है&quest; जानें नहाय-खाय&comma; खरना&comma; अर्घ्य की सही तिथि<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संक्षेप&colon; हिन्दू पंचांग के अनुसार&comma; छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और इसका समापन सप्तमी तिथि पर होता है। इस दौरान श्रद्धालु छठी मैय्या और सूर्य देव की पूजा करते हैं। इस साल छठ पूजा का पर्व 25 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 28 अक्टूबर 2025 को समाप्त होगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>हिन्दू पंचांग के अनुसार&comma; छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और इसका समापन सप्तमी तिथि पर होता है। इस दौरान श्रद्धालु छठी मैय्या और सूर्य देव की पूजा करते हैं। इस साल छठ पूजा का पर्व 25 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 28 अक्टूबर 2025 को समाप्त होगा। यह त्योहार दिवाली के बाद मनाया जाता है और मुख्य रूप से बिहार&comma; झारखंड और उत्तर प्रदेश में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा का व्रत संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। दूसरे दिन को खरना कहा जाता है&comma; इस दिन पूरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है। तीसरे दिन संध्या अर्घ्य होता है। इस दिन डूबते हुए सूर्य देव को दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है। यह दिन छठ पर्व का सबसे भावनात्मक और भक्तिमय पल होता है&comma; जब महिलाएं घाट पर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना करती हैं। चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है&comma; जिसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। इस तरह चार दिन चलने वाला यह पर्व श्रद्धा&comma; संयम और सूर्य भक्ति का प्रतीक है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>छठ पूजा के चार दिन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>पहला दिन –<br>नहाय-खाय-25 अक्टूबर 2025<br>छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ-सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चना दाल&comma; कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत की शुरुआत होती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दूसरा दिन – खरना- 26 अक्टूबर<br &sol;>दूसरे दिन को लोहंडा या खरना कहा जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाती हैं और फिर सूर्य देव की पूजा करने के बाद यह प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण छठ के समापन के बाद ही किया जाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य- 27 अक्टूबर<br &sol;>तीसरे दिन सूर्य देव की पूजा होती है। डूबते हुए सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन ठेकुआ&comma; मौसमी फल और अन्य प्रसाद सूर्य देव को चढ़ाए जाते हैं। यह दिन बहुत ही विशेष माना जाता है और श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ उपवास रखते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>चौथा दिन – उषा अर्घ्य- 28 अक्टूबर<br &sol;>अंतिम दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चा दूध और प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है। इस साल उषा अर्घ्य सूर्योदय के समय 6&colon;30 बजे होगा।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

पुलिस सप्ताह में रोमांचक क्रिकेट मुकाबला, पुलिस लाइन ने सिविल प्रशासन को हराया

वैभव सूर्यवंशी को 50 लाख का चेक और अंगवस्त्र देकर किया सम्मानित : मुख्यमंत्री

सरस्वती बसंत पटेल अतिथिशाला के भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री