इंसेंटिव के इंतजार में फीकी पड़ी होली, आशा वर्करों के घर नहीं बन पाए पुए-पकवान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत<&sol;strong>। होली जैसे बड़े त्योहार पर भी फुलवारी शरीफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आशा वर्करों के घरों में इस बार पुए-पकवान नहीं बन पाए&period; पिछले करीब छह महीनों से इंसेंटिव का भुगतान नहीं मिलने के कारण कई आशा कर्मियों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है और त्योहार की खुशियां भी अधूरी रह गईं&period; अब ईद भी आने वाली है मुस्लिम महिला आशा वर्कों को उम्मीद है कि शायद सरकार ईद पर उनके घर खुशियों की सौगात वेतन के रूप में दे। आशा वर्करों का कहना है कि वे लगातार स्वास्थ्य विभाग के काम में जुटी रहती हैं&comma; लेकिन मेहनत के बदले मिलने वाला इंसेंटिव समय पर नहीं मिल रहा है&period; ऐसे में घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है&period; कई कर्मियों ने बताया कि दशहरा&comma; दिवाली और छठ जैसे बड़े पर्व पहले ही बिना पैसे के गुजर गए और अब होली का त्योहार भी फीका पड़ गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आशा वर्कर संगीता देवी&comma; रूबी कुमारी&comma; शमा प्रवीण और गायत्री देवी समेत कई अन्य कर्मियों ने बताया कि छह महीनों से इंसेंटिव नहीं मिलने के कारण परिवार चलाना कठिन हो गया है&period; उनका कहना है कि त्योहार के मौके पर बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदना तो दूर&comma; घर में पारंपरिक होली के पुए-पकवान तक बनाना संभव नहीं हो पाया। आशा कर्मियों ने बताया कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं&period; गर्भवती महिलाओं की देखभाल&comma; सुरक्षित प्रसव&comma; बच्चों के टीकाकरण&comma; परिवार नियोजन और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है&period; इसके बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिलना उनके लिए चिंता का विषय बन गया है&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फुलवारी शरीफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत करीब 180 आशा वर्कर कार्यरत हैं&comma; जो शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं&period; पहले उन्हें लगभग 1000 रुपये इंसेंटिव मिलता था&comma; जिसे बढ़ाकर करीब 3000 रुपये किया गया है&comma; लेकिन भुगतान में लगातार देरी हो रही है। इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीसीएम अंबिका प्रसाद ने बताया कि फिलहाल फंड की कमी के कारण इंसेंटिव भुगतान में देरी हो रही है&period; उन्होंने कहा कि जैसे ही सरकार से राशि उपलब्ध होगी&comma; सभी आशा वर्करों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा&period; आशा वर्करों ने सरकार से मांग की है कि उनका लंबित इंसेंटिव जल्द जारी किया जाए&comma; ताकि आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सके और वे पहले की तरह पूरी निष्ठा से स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर सकें।<&sol;p>&NewLine;

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