ड्यूटी पर नहीं थे, फिर भी निभाया फर्ज : एम्स पटना के डॉक्टर ने सड़क पर तड़पती जान को दी नई जिंदगी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> एम्स पटना के ट्रॉमा सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि डॉक्टर का फर्ज अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं होता। 2 फरवरी 2026 को मानवता और चिकित्सकीय जिम्मेदारी की ऐसी मिसाल सामने आई&comma; जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। अपने आवास से एम्स पटना जाते समय दीघा एलिवेटेड रोड पर एम्स पटना के सहायक प्राध्यापक डॉ&period; साकेत प्रकाश की नजर सड़क के बीच बेसुध पड़े एक व्यक्ति पर पड़ी&period; राहगीर तमाशबीन बने खड़े थे&comma; कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर रहा था&period; ऐसे में डॉ&period; साकेत प्रकाश ने बिना एक पल गंवाए अपनी गाड़ी रोकी और मौके पर ही मरीज की हालत का त्वरित आकलन किया। स्थिति गंभीर थी&period; डॉ&period; साकेत ने तुरंत जीवनरक्षक उपचार शुरू किया और मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए घायल को अपनी निजी कार से एम्स पटना पहुंचाया&period; समय पर मिले ट्रॉमा उपचार और डॉक्टरों की सतत कोशिशों के कारण उस व्यक्ति की जान बचाई जा सकी। मरीज की पहचान होने पर लोग चकित रह गए। मरीज भी निकला डॉक्टर।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;newscrime24&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2026&sol;02&sol;img-20260203-wa00313466930857610512991-600x337&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-80156" &sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>होश में आने पर घायल की पहचान डॉ&period; हर्षवर्धन के रूप में हुई&comma; जो नेताजी सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में फिजियोलॉजी विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं&period; यह महज एक संयोग नहीं&comma; बल्कि चिकित्सा सेवा में आपसी समर्पण और संवेदनशीलता की तस्वीर थी। इस सराहनीय कार्य पर ट्रॉमा सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो&period; डॉ&period; अनिल कुमार और एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने डॉ&period; साकेत प्रकाश की खुले दिल से प्रशंसा की&period; उन्होंने कहा कि ऐसे डॉक्टर संस्थान की असली पहचान होते हैं&comma; जो ड्यूटी से बाहर रहते हुए भी इंसानियत का दामन नहीं छोड़ते। एम्स प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की कि सड़क दुर्घटना या किसी भी आपात स्थिति में घायलों की मदद के लिए आगे आएं&period; कई बार मौके पर दी गई शुरुआती सहायता ही जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी तय करती है&period; अस्पताल हर जगह तुरंत नहीं पहुंच सकता&comma; लेकिन संवेदनशील नागरिक हर जगह मौजूद हो सकते हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि इंसानियत जिंदा है&period; सही समय पर उठाया गया एक कदम&comma; एक जिंदगी को अंधेरे से बाहर निकाल सकता है।<&sol;p>&NewLine;

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