बाबू जगदेव फिल्म देखने उमड़ी लोगों की भीड़, शोषित-वंचित समाज की आवाज थे बाबू जगदेव

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> सामाजिक न्याय और समानता के प्रबल पक्षधर रहे बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन और संघर्ष पर आधारित फिल्म को देखने के लिए फुलवारी शरीफ के एक सिनेमा हॉल में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी&period; फिल्म देखने के लिए बच्चे&comma; महिलाएं&comma; बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में पहुंचे&period; दर्शकों ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि बाबू जगदेव का जीवन संघर्ष&comma; त्याग और सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रेरणादायी उदाहरण है&comma; जिससे आज की पीढ़ी को सीख लेने की आवश्यकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समाजसेवी सतीश कुमार एवं डॉ&period; नीतीश कुमार दांगी अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ फिल्म देखने पहुंचे थे&period; फिल्म देखने के बाद उन्होंने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद ने समाज में व्याप्त सामंती व्यवस्था&comma; भेदभाव और शोषण के खिलाफ पूरी मजबूती से आवाज उठाई थी&period; उन्होंने दलित&comma; शोषित&comma; पिछड़े&comma; वंचित और गरीब तबकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया तथा उन्हें सम्मान और बराबरी की लड़ाई लड़ने का साहस दिया। सतीश कुमार ने कहा कि बाबू जगदेव केवल एक राजनीतिक नेता नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के महानायक थे&period; उन्होंने अपना पूरा जीवन शोषित और वंचित समाज को न्याय दिलाने के लिए समर्पित कर दिया&period; उनका संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है&period; उन्होंने कहा कि बाबू जगदेव का सपना था कि समाज के हर व्यक्ति को समान अवसर&comma; सम्मान और अधिकार मिले&period; उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ&period; नीतीश कुमार दांगी ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद ने उस दौर में सामाजिक असमानता और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की&comma; जब ऐसा करना आसान नहीं था&period; उन्होंने वंचित समाज को संगठित कर अधिकारों के लिए संघर्ष करने का मार्ग दिखाया&period; उनका प्रसिद्ध नारा और विचार आज भी सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वालों को प्रेरित करता है&period; उन्होंने कहा कि बाबू जगदेव का जीवन युवाओं के लिए एक संदेश है कि अन्याय और शोषण के खिलाफ हमेशा खड़े रहना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फिल्म देखने पहुंचे लोगों ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को आवाज देने का काम किया&period; उन्होंने सबको बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया&period; उनके विचारों और संघर्षों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसी फिल्मों का निर्माण बेहद जरूरी है&period;<br &sol;>दर्शकों ने फिल्म की कहानी&comma; प्रस्तुति और ऐतिहासिक घटनाओं के चित्रण की सराहना करते हुए कहा कि बाबू जगदेव जैसे महापुरुषों की जीवनी हर युवा तक पहुंचनी चाहिए&period; लोगों ने कहा कि आज के दौर में समाज को बाबू जगदेव के विचारों और उनके संघर्ष से सीख लेने की जरूरत है&period; फिल्म के माध्यम से उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है&comma; जिससे लोगों को उनके योगदान को समझने का अवसर मिला। सिनेमा हॉल में फिल्म समाप्त होने के बाद भी लोग बाबू जगदेव प्रसाद के संघर्ष&comma; विचार और सामाजिक योगदान पर चर्चा करते नजर आए&period; दर्शकों ने कहा कि यह फिल्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक चेतना और प्रेरणा का संदेश देने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है।<&sol;p>&NewLine;

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