‘गोल्डन आवर’ में जीवन बचाने की कला और विज्ञान का संगम, एम्स पटना में दो दिवसीय मीट संपन्न

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> एम्स पटना के आपातकालीन चिकित्सा विभाग द्वारा 2 एवं 3 मई को नर्सिंग कॉलेज परिसर में &OpenCurlyQuote;विद्यार्थी एवं विशेषज्ञ मीट 4&period;0’ का आयोजन किया गया&period; यह दो दिवसीय कार्यक्रम देशभर के युवा चिकित्सा विद्यार्थियों और अनुभवी विशेषज्ञों के बीच ज्ञान&comma; कौशल और अनुभव के आदान-प्रदान का मंच बना।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का मुख्य केंद्र &OpenCurlyQuote;गोल्डन आवर’ रहा&comma; जिसे किसी भी मरीज के जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है&period; पहले दिन आयोजित इमरजेंसी मेडिकल ट्रेनिंग कार्यशाला में हृदय एवं तंत्रिका संबंधी आपात स्थितियों पर विस्तार से चर्चा हुई&period; कार्डियक अरेस्ट&comma; स्ट्रोक&comma; अतालता और हाइपरटेंसिव क्राइसिस जैसी गंभीर स्थितियों में त्वरित निर्णय और प्रभावी उपचार के तरीकों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला में डॉ&period; दीपक कुमार द्वारा आयोजित इसीजी क्विज ने विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा और सीखने की भावना को बढ़ाया&period; वहीं डॉ&period; दिवेंदु भूषण ने इमरजेंसी मेडिसिन के महत्व और उसके व्यापक दायरे पर प्रकाश डाला&period; एम्स नई दिल्ली और एम्स पटना के विशेषज्ञों ने आपात स्थितियों में मरीजों के त्वरित मूल्यांकन और प्रबंधन पर व्याख्यान दिए&period; दिन का समापन व्यावहारिक प्रशिक्षण और सॉफ्ट स्किल्स सत्रों के साथ हुआ&comma; जिसमें संवाद और संवेदनशीलता को उपचार का अहम हिस्सा बताया गया। दूसरे दिन &OpenCurlyQuote;गोल्डन आवर में विभिन्न विशेषज्ञताओं के समन्वय’ विषय पर सीएमई सम्मेलन आयोजित हुआ&period; उद्घाटन समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय&comma; नई दिल्ली के डॉ&period; रवि कुमार उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वैज्ञानिक सत्रों का उद्घाटन कार्यकारी निदेशक प्रो&period;&lpar;ब्रिग&period;&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल&comma; डीन &lpar;एकेडमिक्स&rpar; डॉ&period; पूनम प्रसाद भदानी और चिकित्सा अधीक्षक डॉ&period; अनुप कुमार ने किया&period; अपने संबोधन में डॉ&period; अग्रवाल ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा में तकनीकी दक्षता के साथ टीमवर्क&comma; त्वरित निर्णय क्षमता और प्रभावी संवाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है&period; उन्होंने कहा कि आपातकालीन विभाग किसी भी अस्पताल की पहली छवि होता है&comma; इसलिए यहां कार्यरत हर स्वास्थ्यकर्मी की जिम्मेदारी अहम होती है। सम्मेलन में डॉ&period; दीपक कुमार और उनकी टीम द्वारा अंडरग्रेजुएट क्विज का अंतिम चरण भी आयोजित किया गया&comma; जिसमें प्रतिभागियों के ज्ञान और कौशल की परख की गई। इस आयोजन में एम्स मंगलागिरी&comma; एस जी पी जी आई लखनऊ&comma; मेदांता पटना&comma; एम्स नई दिल्ली और एम्स पटना सहित देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की भागीदारी रही&comma; जिससे चिकित्सा शिक्षा और सहयोग का व्यापक स्वरूप सामने आया। कार्यक्रम का समापन वेलिडिक्टरी सत्र&comma; पुरस्कार वितरण और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ&period; आयोजकों ने कहा कि &OpenCurlyQuote;गोल्डन आवर’ में सही प्रशिक्षण&comma; समन्वय और संवेदनशीलता ही मरीजों के लिए सबसे बड़ी जीवनरक्षक साबित होती है।<&sol;p>&NewLine;

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