उर्वरक की कालाबाजारी पर जीरो टॉलरेंस, 330 लाइसेंस रद्द एवं 72 मामलों में प्राथमिकी दर्ज :मंत्री श्री विजय कुमार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24<&sol;strong>&rpar; माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है तथा वर्तमान में किसी भी जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>माननीय मंत्री ने बताया कि 04 सितंबर&comma; 2026 की स्थिति के अनुसार राज्य में 3&period;44 लाख मीट्रिक टन यूरिया&comma; 1&period;52 लाख मीट्रिक टन डीएपी&comma; 2&period;48 लाख मीट्रिक टन एनपीके&comma; 0&period;71 लाख मीट्रिक टन एमओपी तथा 1&period;17 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने पदाधिकारियों को निदेश दिया कि उर्वरक का उप-आवंटन आवश्यकता एवं आच्छादन के आधार पर सुनिश्चित किया जाए&comma; ताकि किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम अभाव की स्थिति उत्पन्न न हो।कृषि मंत्री ने कहा कि उर्वरक की निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री कालाबाजारी&comma; जमाखोरी तथा किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता को राज्य सरकार द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि शारदीय मौसम&comma; 2026-27 में 04 सितंबर&comma; 2026 तक अनियमितता के विरुद्ध 72 उर्वरक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है तथा 330 उर्वरक प्रतिष्ठानों के उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द किए गए हैं।उन्होंने कहा कि उर्वरक की कालाबाजारी&comma; जमाखोरी एवं निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मुख्यालय स्तर पर उड़नदस्ता दल गठित किया गया है। उड़नदस्ता दल द्वारा प्राप्त शिकायतों के आधार पर लगातार निरीक्षण एवं जांच की जा रही है। इसके अतिरिक्त जिलों में कृषि विभाग के पदाधिकारियों की जांच टीम गठित कर उर्वरक प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>माननीय मंत्री ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में सशस्त्र सीमा बल &lpar;SSB&rpar; के साथ समन्वय स्थापित कर निरीक्षण दल द्वारा लगातार निगरानी एवं जांच की जा रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>श्री सिन्हा ने कहा कि राज्य में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों को उर्वरक की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उपलब्धता&comma; उप-आवंटन&comma; वितरण एवं बिक्री व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है तथा इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता करने वाले व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।माननीय मंत्री ने पदाधिकारियों को निदेश दिया कि उर्वरक प्रतिष्ठानों के पीओएस मशीन में प्रदर्शित स्टॉक एवं भौतिक रूप से उपलब्ध उर्वरक की मात्रा का नियमित रूप से सत्यापन किया जाए। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बिक्री अभिलेख&comma; स्टॉक रजिस्टर&comma; उपलब्ध मात्रा तथा निर्धारित मूल्य पर बिक्री की भी जांच की जाए। निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध तत्काल विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।उन्होंने कहा कि किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने&comma; उर्वरक के साथ किसी अन्य उत्पाद की अनिवार्य बिक्री करने&comma; उर्वरक की उपलब्धता के बावजूद कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने अथवा उर्वरक उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान का प्राधिकार पत्र रद्द अथवा निलंबित करने&comma; प्राथमिकी दर्ज कराने सहित अन्य विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>माननीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान में यूरिया का कुल लागत मूल्य ₹2&comma;232 प्रति बैग है&comma; जिसमें सरकार द्वारा लगभग ₹1&comma;966 प्रति बैग सब्सिडी के रूप में वहन की जा रही है तथा किसानों के लिए यूरिया का निर्धारित बाजार मूल्य ₹266&period;50 प्रति बैग है।उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी फसल की आवश्यकता एवं अनुशंसा के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें तथा उर्वरक खरीदते समय बिक्री रसीद अवश्य प्राप्त करें। यदि किसी विक्रेता द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक राशि की मांग की जाती है अथवा किसी अन्य उत्पाद की अनिवार्य बिक्री के लिए दबाव बनाया जाता है&comma; तो इसकी सूचना किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 अथवा विभाग द्वारा जारी WhatsApp नंबर 7766085888 पर दें।<&sol;p>&NewLine;

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