जब मां सुरक्षित, तभी सृष्टि सुरक्षित : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना में सुरक्षित मातृत्व पर जागरूकता का बड़ा अभियान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित। <&sol;strong>&OpenCurlyDoubleQuote;जब मां सुरक्षित&comma; तभी सृष्टि सुरक्षित” के भाव को साकार करते हुए पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर सप्ताह भर चलने वाले जागरूकता एवं चिकित्सा कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया&period; यह पहल संवेदना&comma; विज्ञान और संकल्प का अद्भुत संगम बनकर उभरी&comma; जिसमें सुरक्षित मातृत्व को समाज के केंद्र में लाने का प्रयास किया गया। मां को जीवन की पहली धड़कन और सृजन की आधारशिला बताते हुए आयोजित इस श्रृंखला का समापन &OpenCurlyDoubleQuote;स्ट्रांग मदर्स&comma; सेफ फ्यूचर” विषय पर सीएमई के साथ हुआ&comma; जहां हर संवाद और प्रस्तुति का केंद्र मातृ एवं नवजात सुरक्षा रहा&period; सप्ताह भर चले मरीज जागरूकता अभियान ने अस्पताल की सीमाओं से आगे बढ़कर समाज में विश्वास और सहयोग का संदेश दिया&period; डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद ने यह स्पष्ट किया कि सुरक्षित मातृत्व केवल चिकित्सा नहीं बल्कि हर परिवार का अधिकार और समाज की जिम्मेदारी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टर प्रतियोगिता ने कार्यक्रम में सृजनात्मकता का रंग भरा&comma; जिसमें &OpenCurlyDoubleQuote;हर सुरक्षित जन्म&comma; एक नई उम्मीद की शुरुआत है” का संदेश प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। समापन समारोह का उद्घाटन संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल&comma; डॉ&period; पूनम भदानी&comma; डॉ&period; संजय पांडे&comma; डॉ&period; रुचि सिन्हा एवं डॉ&period; अनूप कुमार द्वारा किया गया&period; अपने संबोधन में डॉ&period; राजू अग्रवाल ने गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल &lpar;एंटीनैटल केयर&rpar; को सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला बताते हुए कहा कि हर गर्भवती महिला तक समय पर संवेदनशील और समर्पित चिकित्सा सेवा पहुंचाना आवश्यक है। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ&period; मुक्ता अग्रवाल ने कहा कि समय पर जोखिमपूर्ण गर्भावस्था की पहचान एक मां के सपनों को टूटने से बचा सकती है&period; उन्होंने प्रारंभिक जांच और त्वरित उपचार को सुरक्षित मातृत्व की कुंजी बताया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रो&period; संगम झा ने लेबर रूम में टीम वर्क के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समन्वय और सहयोग से ही सुरक्षित प्रसव संभव है। इस सीएमई में स्त्री रोग विशेषज्ञों&comma; शिशु रोग विशेषज्ञों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही&comma; जिसने इसे ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का सशक्त मंच बना दिया&period; पूरे आयोजन के दौरान &OpenCurlyDoubleQuote;सुरक्षित मातृत्व&comma; स्वस्थ समाज की पहली शर्त है” का संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। कार्यक्रम के समापन पर यह संकल्प दोहराया गया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर जागरूकता&comma; नवाचार और समर्पण के साथ कार्य करता रहेगा&comma; ताकि हर गर्भावस्था सुरक्षित हो&comma; हर जन्म एक उत्सव बने और हर मां को सम्मान&comma; सुरक्षा एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।<&sol;p>&NewLine;

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